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शंकर रम रयो रे पहाड़ा में गौरा पार्वती के संग

भगवान शंकर का निवास हिमालय की पवित्र पहाड़ियों में है, जहाँ वे माता गौरा पार्वती के संग रमण करते हैं। शंकर रम रयो रे पहाड़ा में गौरा पार्वती के संग भजन हमें इस दिव्य दृश्य की अनुभूति कराता है, जहाँ शिव-पार्वती का प्रेम, सौंदर्य और शांति बसती है। यह भजन भक्तों को शिव-पार्वती के उस अलौकिक संगम से जोड़ता है, जहाँ संपूर्ण सृष्टि का कल्याण निहित है।

Shankar Ram Rayo Re Pahada Me Gaura Parvati Ke Sang

शंकर रम रयो रे पहाड़ा में,
गौरा पार्वती के संग,
पार्वती के संग,
गौरा महारानी के संग,
भोलो बाबो रम रयो रे पहाड़ा में,
गौरा पार्वती के संग।1।

सेर खा गयो खारी तमाखु,
सेर पी गयो भंग,
आक धतूरा भोग लगत है,
रहे नशे में दंग,
भोलो बाबो रम रयो रे पहाड़ा में,
गौरा पार्वती के संग।2।

हाथ में थारे त्रिशूल भाला,
भस्मी रमावे अंग,
माथे थारे चन्द्र बिराजे,
जटा जुट में गंग,
भोलो बाबो रम रयो रे पहाड़ा में,
गौरा पार्वती के संग।3।

ढोलक बाजे मजीरा बाजे,
और बाजे मृदंग,
भोलेनाथ का डमरू बाजे,
महाराणी के संग,
भोलो बाबो रम रयो रे पहाड़ा में,
गौरा पार्वती के संग।4।

कोरा कोरा कलश मंगाया,
जा में घोल्या रंग,
‘सूरदास’ की काली कमलिया,
चढ़े न दूजो रंग,
भोलो बाबो रम रयो रे पहाड़ा में,
गौरा पार्वती के संग।5।

शंकर रम रयो रे पहाड़ा में,
गौरा पार्वती के संग,
पार्वती के संग,
गौरा महारानी के संग,
भोलो बाबो रम रयो रे पहाड़ा में,
गौरा पार्वती के संग।6।

भगवान शंकर और माता पार्वती की महिमा अपरंपार है, और उनकी भक्ति से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है। “शंकर रम रयो रे पहाड़ा में गौरा पार्वती के संग” भजन की तरह “आए है सावन में शंकर माँ गौरा जी के साथ”, “शिव का जपले नाम क्या लागे तेरा”, “शंकर भोले भंडारी तुम जन जन के हितकारी” और “भोलेनाथ ने पकड़ा हाथ नहीं तो मैं बह जाता” जैसे भजन भी हमें शिवजी की असीम कृपा और उनकी पवित्र लीलाओं का अनुभव कराते हैं। आइए, इन भजनों का पाठ करें और शिव भक्ति में लीन हों। ????????

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