तुम भी बोलो रघुपति और हम भी बोले रघुपति एक सुंदर भजन है जो भक्तों के बीच राम के प्रति एकता और भक्ति की भावना को प्रकट करता है। इस भजन में, दोनों गायक और श्रोता मिलकर भगवान श्रीराम का नाम उच्चारण करते हैं। यह भजन हमें यह सिखाता है कि राम के नाम में अपार शक्ति है और यदि हम सब मिलकर उनका नाम लें, तो हमारी हर कठिनाई दूर हो सकती है। यह भजन एकता, प्रेम और समर्पण का प्रतीक है, जो हमें राम के प्रति सच्ची भक्ति का अहसास कराता है।
Tum Bhi Bolo Raghupati Aur Hum Bhi Bole Raghupati
दोहा –
श्री राम को देख के जनक नंदिनी,
बाग में खड़ी की खड़ी रह गयी,
श्री राम देखे सिया को सिया राम को,
चार अखिया लड़ी की लड़ी रह गयी।
सिया के ब्याह की बजने लगी है शहनाई,
धनुष को तोड़ने की आज वो घड़ी आई,
जनकपुरी में लगा है आज वीरो का मेला,
उन्ही के बीच में बैठे हुए है रघुराई।
तोड़ने धनवा चले,
श्री राम राजा रघुपति,
और हाथ में माला लिए,
खड़ी है सीता भगवती,
तुम भी बोलो रघुपति,
और हम भी बोले रघुपति।1।
स्वयंवर सीता का,
राजा जनक ने रच डाला,
धनुष को तोड़ने,
आएगा कोई मतवाला,
गुरु के साथ में,
श्री राम और लखन आए,
मिले जो नैन सीता से,
तो मन मुस्काये,
मायूस है सीता की माता,
आज सुनेनावती,
कैसी शर्त आपने,
रखी है ये मेरे पति,
अरे तुम भी बोलो रघुपती,
और हम भी बोले रघुपती।2।
धनुष को तोड़ने,
ये वीर पंक्तियों में खड़े है,
किसी की मुंछ खड़ी है,
किसी के नैन चढ़े है,
लगा के जोर थक गए,
वो शूरवीर बड़े है,
आज तोड़ेंगे इसे हम,
वो अपनी जिद पे अड़े है,
शिव धनुष हिला नहीं,
आये थे जो सेनापति,
हार के बैठे हुए है,
बड़े बड़े महारथी,
अरे तुम भी बोलो रघुपती,
और हम भी बोले रघुपती।3।
गुरु के छू के चरण,
राम ने धनुष तोड़ा,
धनुष को तोड़ के,
सीता की तरफ मुंह मोड़ा,
सिया चल कर के प्रभु,
राम के करीब आई,
हाथ में माला लिए,
राम जी को पहनाई,
अरे शान से खड़े हुए है,
आज वो अवधपति,
साथ में खड़ा हुआ,
भाई वो लखनजति,
अरे तुम भी बोलो रघुपती,
और हम भी बोले रघुपती।4।
मोहल्ले और गली गली में,
ख़ुशी छाई है,
सिया के ब्याह की,
पावन घड़ी जो आई है,
जनक की लाडली की,
आज ये विदाई है,
सिया के ब्याह की,
‘पागल’ ने महिमा गाई है,
श्री राम का करले भजन,
इसी में प्यारे सदगति,
‘प्रेमी’ की कलम में रहे,
हर घड़ी सरस्वती,
अरे तुम भी बोलो रघुपती,
और हम भी बोले रघुपती।5।
तोड़ने धनवा चले,
श्री राम राजा रघुपति,
और हाथ में माला लिए,
खड़ी है सीता भगवती,
तुम भी बोलो रघुपति,
और हम भी बोले रघुपति।6।
तुम भी बोलो रघुपति और हम भी बोले रघुपति भजन में राम के नाम का जाप करने की शक्ति और महिमा को महसूस किया जाता है। जैसे राम का नाम है प्यारा और राम शरण में आजा तू भी जैसे भजन हमें प्रभु राम की कृपा और आशीर्वाद को प्राप्त करने के लिए प्रेरित करते हैं, वैसे ही यह भजन हमें एकजुट होकर उनके नाम का उच्चारण करने का महत्व बताता है। राम के जयकारे से वातावरण में पवित्रता और शांति का आभास होता है, और हम सभी मिलकर राम के नाम का जाप करके अपने जीवन को आशीर्वादित कर सकते हैं। जय श्रीराम!

मैं आचार्य ब्रह्मदत्त, सनातन धर्म का एक साधक और आध्यात्मिक ज्ञान का प्रचारक हूँ। मेरा जीवन देवी-देवताओं की आराधना, वेदों-पुराणों के अध्ययन और भक्ति मार्ग के अनुसरण में समर्पित है। सूर्य देव, खाटू श्याम, शिव जी और अन्य देवी-देवताओं की महिमा का गुणगान करना मेरे लिए केवल एक लेखन कार्य नहीं, बल्कि एक दिव्य सेवा है। मैं अपने लेखों के माध्यम से भक्तों को पूजन विधि, मंत्र, स्तोत्र, आरती और धार्मिक ग्रंथों का ज्ञान सरल भाषा में प्रदान करने का प्रयास करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने आध्यात्मिक पथ को सुगम और सार्थक बना सके। View Profile