Nath Mujh Anath Par Daya Kijiye
श्लोक
दीनानाथ अनाथ का,
भला मिला संयोग…
गर मुझे ना तारा तो,
हंसी करेंगे लोग।।
नाथ मुझ अनाथ पर,
दया कीजिये…
आप अपने चरणों को,
धुला लीजिये।।
मेरे घाट आ गए है,
चरण को बढाइये,
आइये करीब आके,
चरण को धुलाईये…
हाथ मेरे माथ पर,
रख दीजिये,
आप अपने चरणों को,
धुला लीजिये।।
रीतियों से पार करना,
केवटों का काम है,
पार करते आप सबको,
केवटों का नाम है…
मेरी हर बात पर,
गौर कीजिये,
आप अपने चरणों को,
धुला लीजिये।।
चरण को धुला करके,
नाव में बिठाया,
नाव में बिठा करके,
पार पहुचाया…
पार किया है तुमको,
मुझे तार दीजिये,
आप अपने चरणों को,
धुला लीजिये।।

मैं आचार्य ब्रह्मदत्त, सनातन धर्म का एक साधक और आध्यात्मिक ज्ञान का प्रचारक हूँ। मेरा जीवन देवी-देवताओं की आराधना, वेदों-पुराणों के अध्ययन और भक्ति मार्ग के अनुसरण में समर्पित है। सूर्य देव, खाटू श्याम, शिव जी और अन्य देवी-देवताओं की महिमा का गुणगान करना मेरे लिए केवल एक लेखन कार्य नहीं, बल्कि एक दिव्य सेवा है। मैं अपने लेखों के माध्यम से भक्तों को पूजन विधि, मंत्र, स्तोत्र, आरती और धार्मिक ग्रंथों का ज्ञान सरल भाषा में प्रदान करने का प्रयास करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने आध्यात्मिक पथ को सुगम और सार्थक बना सके। View Profile