Mere Malik Ki Dukan Me Sab Logo Ka Khata
मेरे मालिक की दुकान में,
सब लोगो का खाता,
जो नर जैसा करम करेगा…
वैसा ही फल पाता,
मेरे मालिक की दुकान मे…
सब लोगो का खाता।।
क्या साधु क्या संत ग्रहस्ती,
क्या राजा क्या रानी,
प्रभु की पुस्तक में लिखी है,
सबकी करम कहानी…
वही तो सबके जमा खर्च का,
सही हिसाब लगाता,
मेरे मालिक की दुकान मे…
सब लोगो का खाता।।
करता है इंसाफ सभी के,
सिंहासन पर डट के,
उसका फैसला कभी ना टलता,
लाख कोई सर पटके…
समझदार तो चुप रहता है,
ओर मुर्ख शोर मचाता,
मेरे मालिक की दुकान मे…
सब लोगो का खाता।।
नहीं चले उसके घर रिश्वत,
नहीं चले चालाकी,
उसके अपने लेन देन की,
रीत बड़ी है बांकी…
पूण्य का बेडा पार करे,
पापी की नाव डूबाता,
मेरे मालिक की दुकान मे…
सब लोगो का खाता।।
अच्छी करनी करीयो लाला,
करम ना करीयो काला,
देख रहा है लाख आँख से,
तुझको ऊपर वाला…
सतगुरु संत से प्रेम लगा ले,
समय गुजरता जाता,
मेरे मालिक की दुकान मे…
सब लोगो का खाता।।
मेरे मालिक की दुकान में,
सब लोगो का खाता,
जो नर जैसा करम करेगा…
वैसा ही फल पाता,
मेरे मालिक की दुकान मे…
सब लोगो का खाता।।

मैं आचार्य ब्रह्मदत्त, सनातन धर्म का एक साधक और आध्यात्मिक ज्ञान का प्रचारक हूँ। मेरा जीवन देवी-देवताओं की आराधना, वेदों-पुराणों के अध्ययन और भक्ति मार्ग के अनुसरण में समर्पित है। सूर्य देव, खाटू श्याम, शिव जी और अन्य देवी-देवताओं की महिमा का गुणगान करना मेरे लिए केवल एक लेखन कार्य नहीं, बल्कि एक दिव्य सेवा है। मैं अपने लेखों के माध्यम से भक्तों को पूजन विधि, मंत्र, स्तोत्र, आरती और धार्मिक ग्रंथों का ज्ञान सरल भाषा में प्रदान करने का प्रयास करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने आध्यात्मिक पथ को सुगम और सार्थक बना सके। View Profile