बिना राम रघुनंदन के कोई नहीं है अपना रे भजन हमें प्रभु श्रीराम की अनंत कृपा और भक्ति का अहसास कराता है। इस संसार में जितने भी रिश्ते-नाते हैं, वे सब क्षणिक हैं, लेकिन राम जी का प्रेम और उनका साथ सदा बना रहता है। यह भजन हमें प्रेरित करता है कि हम सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर भगवान राम की शरण में जाएं, क्योंकि वही हमारे सच्चे सहारे हैं। जब-जब हम दुखी होते हैं या जीवन में अकेलापन महसूस करते हैं, तब राम जी का नाम ही हमें संबल देता है।
Bina Ram Raghunandn Ke Koi Nahin Hai Apna Re
बिना राम रघुनंदन के,
कोई नहीं है अपना रे,
जहाँ राम है सच वही,
बाकी जगत इक सपना रे,
सदा राम रहे राज़ी मुझसे,
कर्म वही मुझे करना है,
जहां धर्म है वही राम,
मन राम रंग ही रंगना है,
बोलो राम जय सिया राम,
जय रघुनंदन जय सियाराम।1।
राम की करुणा किरपा है,
जो अब तक मुझे संभाले है,
यदा कदा नहीं सर्वदा,
संकट से राम निकाले है,
मैं राम का हूँ और राम मेरे,
बाकी फ़िकर क्या करना रे,
जहाँ राम है सुख वही,
दुःख में भी राम को भजना रे,
बोलो राम जय सिया राम,
जय रघुनंदन जय सियाराम।2।
राम की हर इक आदत जब,
आदत मेरी बन जाएगी,
उस दीन जगत में राम कसम,
हर बात मेरी बन जाएगी,
माया पति जब मेरे पास,
माया को फिर क्या तरसना रे,
जहाँ राम है यश वही,
जीवन की मधुर हर रसना रे,
बोलो राम जय सिया राम,
जय रघुनंदन जय सियाराम।3।
वो सतयुग था ये कलयुग है,
यहाँ राम से ज्यादा रावण है,
रहे आज भी महल में रावण,
और राम भटकता वन वन है,
अटल है जग में राम की जीत,
रावण को पडेगा मरना रे,
जहाँ राम है मुक्ति वहीँ,
अब सहारे तरना रे,
बोलो राम जय सिया राम,
जय रघुनंदन जय सियाराम।4।
बिना राम रघुनंदन के,
कोई नहीं है अपना रे,
जहाँ राम है सच वही,
बाकी जगत इक सपना रे,
सदा राम रहे राज़ी मुझसे,
कर्म वही मुझे करना है,
जहां धर्म है वही राम,
मन राम रंग ही रंगना है,
बोलो राम जय सिया राम,
जय रघुनंदन जय सियाराम।5।
राम भक्ति का मार्ग हमें आत्मिक शांति और सुख प्रदान करता है। बिना राम रघुनंदन के कोई नहीं है अपना रे भजन यही सीख देता है कि संसार में सब कुछ बदल सकता है, लेकिन राम जी का प्रेम अटूट और सच्चा है। अगर यह भजन आपके हृदय को छू गया हो, तो राम शरण में आजा तू भी ईर्ष्या सारी छोड़ दे और श्री राम जी के चरणों में मन को लगा ले रे जैसे भजन भी आपको भक्ति रस में डुबो देंगे। प्रभु श्रीराम की महिमा गाने और सुनने से हमारा जीवन सफल बनता है। जय श्रीराम! ????

मैं आचार्य ब्रह्मदत्त, सनातन धर्म का एक साधक और आध्यात्मिक ज्ञान का प्रचारक हूँ। मेरा जीवन देवी-देवताओं की आराधना, वेदों-पुराणों के अध्ययन और भक्ति मार्ग के अनुसरण में समर्पित है। सूर्य देव, खाटू श्याम, शिव जी और अन्य देवी-देवताओं की महिमा का गुणगान करना मेरे लिए केवल एक लेखन कार्य नहीं, बल्कि एक दिव्य सेवा है। मैं अपने लेखों के माध्यम से भक्तों को पूजन विधि, मंत्र, स्तोत्र, आरती और धार्मिक ग्रंथों का ज्ञान सरल भाषा में प्रदान करने का प्रयास करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने आध्यात्मिक पथ को सुगम और सार्थक बना सके। View Profile