प्रभु दीनन के पालनहार

प्रभु दीनन के पालनहार—यह भजन कृष्ण जी की दयालुता और करुणा का गुणगान करता है। जब-जब संसार में अंधकार बढ़ा, तब-तब उन्होंने अपने भक्तों की रक्षा के लिए अवतार लिया। जो भक्त सच्चे मन से प्रभु को पुकारता है, उसकी सुध खुद ठाकुर जी लेते हैं। यह भजन हमें सिखाता है कि श्री कृष्ण केवल राजा नहीं, बल्कि गरीबों, असहायों और दुखियों के भी तारणहार हैं।

Prabhu Dinan Ke Palanhaar

सुनो दातारी अर्ज हमारी,
लीले के असवार,
प्रभु दीनन के पालनहार,
प्रभु दीनन के पालन हार।1।

हारे के प्रभु आप सहारे,
बिगड़े कारज आप सवारे,
मोरछड़ी फिर से लहराकर,
कर दो भव से पार,
प्रभु दीनन के पालन हार,
प्रभु दीनन के पालन हार।2।

खाटू में प्रभु धाम तिहारो,
मन भावे थारो रूप अति प्यारो,
फागुन शुक्ल द्वादश मेले में,
शीश झुकाए संसार,
प्रभु दीनन के पालन हार,
प्रभु दीनन के पालन हार।3।

कलयुग के प्रभु तुम अवतारी,
तीन बाण के तुम हो धारी,
शीश के दानी महा बलवानी,
तुम ही लख दातार,
प्रभु दीनन के पालन हार,
प्रभु दीनन के पालन हार।4।

घर घर पूजा होती तुम्हारी,
तुम पर रीझे कृष्ण मुरारी,
‘राधिका’ जो भी शरण में आए,
तुमने किया उद्धार,
प्रभु दीनन के पालन हार,
प्रभु दीनन के पालन हार।5।

सुनो दातारी अर्ज हमारी,
लीले के असवार,
प्रभु दीनन के पालनहार,
प्रभु दीनन के पालन हार।6।

श्याम बाबा हर उस भक्त के सहायक हैं, जो उन्हें सच्चे मन से पुकारता है। उनका प्रेम किसी भेदभाव का मोहताज नहीं, वे सब पर समान कृपा बरसाते हैं। यदि यह भजन आपके हृदय को छू गया, तो तेरे होते मेरी हार बाबा कैसे होंगी, मुझे तुम याद आए श्याम भजन, और दिल का सुनाऊँ किसे हाल मेरे सांवरे जैसे भजनों को भी अवश्य करें और प्रभु की महिमा में लीन हो जाएं। जय श्री श्याम! ????????????

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