जब भक्त पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ प्रभु श्रीकृष्ण की शरण में आता है, तो उसका मन केवल एक ही प्रार्थना करता है—हे प्रभु, कृपा बरसाइए! भजन मैं हूँ शरण तिहारी, थोड़ी कृपा दिखाओ इसी भक्तिभाव को प्रकट करता है, जहाँ एक भक्त अपने जीवन की सारी चिंताओं को प्रभु के चरणों में अर्पित कर केवल उनकी कृपा की याचना करता है। यह भजन हमें सिखाता है कि श्रीकृष्ण की शरण में आना ही जीवन का सबसे बड़ा संबल है।
Main Hun Sharan Tihari Thodi Kripa Dikhao
मैं हूँ शरण तिहारी,
थोड़ी कृपा दिखाओ,
मैं ना रिझा सकूंगा,
मैं ना रिझा सकूंगा,
मुझ पे भी तरस खाओ,
मै हूं शरण तिहारी,
थोड़ी कृपा दिखाओ।।1।।
दरबार आपका ये,
दीनों का है ठिकाना,
तुम हो दयालु बाबा,
कहता है ये जमाना,
मुझको भी दो सहारा,
मुझको भी दो सहारा,
मेरा साथ भी निभाओ,
मै हूं शरण तिहारी,
थोड़ी कृपा दिखाओ।।2।।
बाहें पसार के मैं,
आवाज दे रहा हूँ,
मेरी भी अर्ज सुन लो,
इतना ही कह रहा हूँ,
हे नाथ चुप क्यों बैठे,
हे नाथ चुप क्यों बैठे,
इतना मुझे बताओ,
मै हूं शरण तिहारी,
थोड़ी कृपा दिखाओ।।3।।
क्या मेरे आंसुओं का,
कोई मोल भी नहीं है,
या कह दो दीन की अब,
दरकार ही नहीं है,
ठोकर दो या दो चौखट,
ठोकर दो या दो चौखट,
कोई फैसला सुनाओ,
मै हूं शरण तिहारी,
थोड़ी कृपा दिखाओ।।4।।
मैं हूँ शरण तिहारी,
थोड़ी कृपा दिखाओ,
मैं ना रिझा सकूंगा,
मैं ना रिझा सकूंगा,
मुझ पे भी तरस खाओ,
मै हूं शरण तिहारी,
थोड़ी कृपा दिखाओ।।5।।
जो भी श्रीकृष्ण की शरण में आता है, उस पर उनकी अपार कृपा अवश्य बरसती है। उनका नाम, उनकी भक्ति और उनकी शरणागति जीवन के हर संकट को हर लेती है। ऐसे ही भक्तिमय भजनों को पढ़ें और करें, जैसे मेरा दिलदार है साँवरा , दरबार मेरे श्याम का सबको बुला रहा , दर दर भटकने वाले, बाबा से दिल लगाले और दिल श्याम धणी पे डोला दीदार के लिए , जिससे श्रीकृष्ण की भक्ति और अधिक प्रगाढ़ हो जाए। ????????