खाटू में बैठ्यो दीनानाथ रे

श्रीश्याम का धाम खाटू, भक्तों की आस्था और श्रद्धा का केंद्र है, जहाँ हर किसी को दीनानाथ के दर्शन से अपार शांति मिलती है। भजन खाटू में बैठ्यो दीनानाथ रे इसी भक्ति भावना का प्रतीक है, जहाँ भक्त अपने प्रिय श्याम बाबा को दीन-दुखियों के नाथ के रूप में पुकारता है। जब कोई सच्चे मन से खाटू नगरी की ओर रुख करता है, तो श्रीश्याम की कृपा से उसके जीवन के सभी दुख स्वतः ही समाप्त हो जाते हैं।

Khatu Me Baithyo Dinanath Re

म्हारी बात बनावे,
खाटू में बैठ्यो दीनानाथ रे,
खाटु में बैठ्यों दीनानाथ रे,
खाटु में बैठ्यों दीनानाथ रे,
म्हारी लाज बचावे,
खाटु में बैठयों दीनानाथ रे।।1।।

क्यों करा चिंता फिकर यो,
हरदम म्हारे सागे,
थे ही घर का मालिक हो,
बाप माई सो लागे,
म्हारी भुल मिटा दे,
छोडू ना बाबा थारो हांथ रे,
म्हारी लाज बचावे,
खाटु में बैठयों दीनानाथ रे।।2।।

जब भी निकलू घर सु बाबा,
नाम थारो ही ध्यायु,
दुनिया की परवाह नहीं थारे,
आगे हाथ बढाऊ,
ओ म्हारो हाथ पकड़के,
चल देवे बाबो म्हारे साथ रे,
म्हारी लाज बचावे,
खाटु में बैठयों दीनानाथ रे।।3।।

जब जब म्हारो मनडो होवें,
बाबा घणो उदास,
आफत के आने से पहले,
आवे म्हारे पास,
ओ म्हारे मन ने भावे,
सांवरिया थारी मीठी बात रे,
म्हारी लाज बचावे,
खाटु में बैठयों दीनानाथ रे।।4।।

म्हारी बात बनावे,
खाटू में बैठ्यो दीनानाथ रे,
खाटु में बैठ्यों दीनानाथ रे,
खाटु में बैठ्यों दीनानाथ रे,
म्हारी लाज बचावे,
खाटु में बैठयों दीनानाथ रे।।5।।

खाटू नगरी में बसने वाले श्रीश्याम अपने भक्तों के हर दुःख को हर लेते हैं और अपनी कृपा से जीवन को आनंदमय बना देते हैं। उनकी महिमा अपरंपार है, और जो भी उन्हें सच्चे मन से पुकारता है, उसकी हर मनोकामना पूर्ण होती है। ऐसे ही भक्तिमय भजनों को पढ़ें और करें, जैसे ग्यारस का त्यौहार है, गाड़ी खड़ी या तैयार है ,म्हारो सेठ रूखालो, मेरी गाड़ी को डिलेवर , कृपा तेरी है सरकार, मेरो मौज करे परिवार और जिसे चाहिए बाबा का खजाना, अपने दोनों हाथ उठाना , जिससे श्रीश्याम की भक्ति और भी गहरी हो जाए। ????????

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