जैसे रखोगे सांवरे, वैसे रह लूंगी —यह भजन भक्त की संपूर्ण समर्पण भावना को दर्शाता है। जब कोई सच्चे मन से श्याम बाबा को अपना सब कुछ मान लेता है, तो उसे फिर संसार की कोई चिंता नहीं रहती। यह भजन हमें यह सिखाता है कि बाबा की शरण में जाने वाला हर भक्त उनके निर्णय को स्वीकार करता है और हर परिस्थिति में खुद को समर्पित कर देता है।
Jaise Rakhoge Sanvare Waise Rah Lungi
जैसे रखोगे सांवरे,
वैसे रह लूंगी,
तू मिल जाए बस मुझको,
तू मिल जाए बस मुझको,
कुछ ना मांगूंगी,
जैसे रखोगे साँवरे,
वैसे रह लूंगी।1।
तेरी हर मर्जी साँवरे,
मेरी भी होगी,
मुझको भरोसा है मेरी,
सुनवाई होगी,
हारे का है सहारा तू,
हारे का है सहारा तू,
मेरी हार ना होगी,
जैसे रखोगे साँवरे,
वैसे रह लूंगी।2।
अपनों ने गैरों ने,
सबने ठुकराया है,
तेरे सिवा किसी ने नहीं,
मुझे अपनाया है,
तेरी दया की छांव में बाबा,
तेरी दया की छांव में बाबा,
मैं रह लूंगी,
जैसे रखोगे साँवरे,
वैसे रह लूंगी।3।
बांह पकड़ कर छोड़ ना देना,
श्याम धनी तुम,
वरना जग मोहमाया में,
हो जाऊंगी गुम,
साथ रहो तुम बस मेरे,
साथ रहो तुम बस मेरे,
फिर सब सह लूंगी,
जैसे रखोगे साँवरे,
वैसे रह लूंगी।4।
जैसे रखोगे सांवरे,
वैसे रह लूंगी,
तू मिल जाए बस मुझको,
तू मिल जाए बस मुझको,
कुछ ना मांगूंगी,
जैसे रखोगे साँवरे,
वैसे रह लूंगी।5।
श्याम बाबा के प्रति पूर्ण समर्पण ही सच्ची भक्ति का प्रतीक है। जो भी भक्त अपने जीवन को उनकी इच्छा के अनुसार सौंप देता है, उसे कभी किसी कष्ट का अनुभव नहीं होता। यदि यह भजन आपके मन को भक्ति-भाव में डुबो गया, तो तेरे होते मेरी हार बाबा कैसे होंगी, श्रृंगार तेरा देखा तो तुझ में खो गया हूँ, और तुझसे ना कुछ छिपा है तुझको तो सब पता है जैसे अन्य भजनों को भी अवश्य करें और श्याम भक्ति के इस आनंद को और गहरा करें। जय श्री श्याम! ????????????