भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन हर भक्त के हृदय को आनंद से भर देता है। भजन ब्रज की गली गली में शोर, आयो आयो माखन चोर उस अद्भुत समय को जीवंत करता है, जब गोकुल की गलियों में कान्हा की माखन चोरी की चर्चा होती थी। ग्वाल-बालों के साथ उनकी शरारतें, मटकी फोड़ने की लीला और उनकी मधुर मुस्कान, इस भजन को गाने और सुनने वाले को बालकृष्ण की भक्ति में डुबा देती हैं।
Braj Ki Gali Gali Me Shor Aayo, Aayo Makhan Chor
ब्रज की गली गली में शोर,
आयो आयो माखन चोर,
आयो माखन चोर,
आयो आयो माखन चोर,
बृज की गली गली में शोर,
आयो आयो माखन चोर।।1।।
नन्द भवन में आनंद बरसे,
नन्द भवन में आनंद बरसे,
नन्द यशोदा को मनवा हरषे,
नन्द यशोदा को मनवा हरषे,
आनंद को ओर ना छोर,
आयो आयो माखन चोर,
बृज की गली गली में शोर,
आयो आयो माखन चोर।।2।।
बाज उठी मंगल शहनाई,
बाज उठी मंगल शहनाई,
जन्म लियो है कुंवर कन्हाई,
जन्म लियो है कुंवर कन्हाई,
कूके कोयल पपीहा मोर,
आयो आयो माखन चोर,
बृज की गली गली में शोर,
आयो आयो माखन चोर।।3।।
हिलमिल सखियाँ मंगल गावे,
हिलमिल सखियाँ मंगल गावे,
ग्वाल बाल सब धूम मचावे,
ग्वाल बाल सब धूम मचावे,
सबके मन में उठे हिलोर,
आयो आयो माखन चोर,
बृज की गली गली में शोर,
आयो आयो माखन चोर।।4।।
धन्य यशोदा तेरो लाला,
धन्य यशोदा तेरो लाला,
सारे जग का है रखवाला,
सारे जग का है रखवाला,
कहे ‘चित्र विचित्र’ कर जोर,
आयो आयो माखन चोर,
बृज की गली गली में शोर,
आयो आयो माखन चोर।।5।।
ब्रज की गली गली में शोर,
आयो आयो माखन चोर,
आयो माखन चोर,
आयो आयो माखन चोर,
बृज की गली गली में शोर,
आयो आयो माखन चोर।।6।।
भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं हमें प्रेम, भक्ति और आनंद से भर देती हैं। उनके माखन चुराने की लीलाएं केवल शरारत नहीं, बल्कि भक्तों के प्रेम का रस चुराने का प्रतीक हैं। ऐसे ही भक्तिमय भजनों को पढ़ें और करें, जैसे आया है घर नंद का लाल, मिलकर थाल बजाओ जी, कृष्ण कन्हैया तुम्हें आना होगा, मुरली मधुर बजाना होगा, आना आना ओ कन्हैया, मेरे हृदय में आ जाना और आते हैं बाबा श्याम को जादू कमाल के, जिससे श्रीकृष्ण की भक्ति और भी गहरी हो जाए। ????????