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हे गुरुदेव तुमको नमन आ गया मैं तुम्हारी शरण

गुरु की शरण में आना ही सच्ची भक्ति और आत्मिक शांति का मार्ग है। जब भक्त सच्चे हृदय से गुरुदेव के चरणों में समर्पित होता है, तो उसे अपार कृपा और आशीर्वाद की प्राप्ति होती है। “हे गुरुदेव, तुमको नमन, आ गया मैं तुम्हारी शरण” भजन इसी भाव को प्रकट करता है कि जीवन के हर मोड़ पर गुरु ही एकमात्र सहारा हैं। आइए, इस भजन के माध्यम से अपने हृदय की भक्ति को व्यक्त करें।

Hey Gurudev Tumko Naman Aa Gaya Mai Sharan

हे गुरुदेव तुमको नमन,
आ गया मैं तुम्हारी शरण,
दे हमें ज्ञान तू,
हर ले अज्ञान तू,
कर दूँ अर्पण तुम्हे अपना मन,
हें गुरुदेव तुमको नमन।।

बिन गुरु के मिले ज्ञान ना,
अच्छे-बुरे की पहचान ना,
मन की दुविधा हरे,
ज्ञान भक्ति भरे,
हैं ये किस पर मेहरबान ना,
कैसे छोड़ूँ मैं तेरे चरण,
आ गया मैं तुम्हारी शरण,
दे हमें ज्ञान तू,
हर ले अज्ञान तू,
कर दूँ अर्पण तुम्हे अपना मन,
हें गुरुदेव तुमको नमन।।

मेरी नैया भँवर आ रही,
नाथ दौड़ो डूबी जा रही,
इस संसार में,
सिंधु मझधार में,
अब बचाओ मुझे तो सही,
फिर मिले ना मिले मानव तन,
आ गया मैं तुम्हारी शरण,
दे हमें ज्ञान तू,
हर ले अज्ञान तू,
कर दूँ अर्पण तुम्हे अपना मन,
हें गुरुदेव तुमको नमन।।

मोह माया से हमको बचा,
ज्ञान सच्चा हमें तू सिखा,
कर कृपा तू अभी,
हम न भटकें कभी,
रास्ता हमको सच्ची दिखा,
मन में लग जाये तेरी लगन,
आ गया मैं तुम्हारी शरण,
दे हमें ज्ञान तू,
हर ले अज्ञान तू,
कर दूँ अर्पण तुम्हे अपना मन,
हें गुरुदेव तुमको नमन।।

आज घट-घट में यश छा रहा,
प्रेम से ‘परशुराम’ गा रहा,
दूर संकट करो,
कष्ट जन के हरो,
भेद भरमों को तू ही मिटा,
”श्रीमानस-मण्डल करे सुमिरन,
आ गया मैं तुम्हारी शरण,
दे हमें ज्ञान तू,
हर ले अज्ञान तू,
कर दूँ अर्पण तुम्हे अपना मन,
हें गुरुदेव तुमको नमन।।

हे गुरुदेव तुमको नमन,
आ गया मैं तुम्हारी शरण,
दे हमें ज्ञान तू,
हर ले अज्ञान तू,
कर दूँ अर्पण तुम्हे अपना मन,
हें गुरुदेव तुमको नमन।।

गुरुदेव की शरण में आकर ही जीवन को वास्तविक आनंद और संतोष की प्राप्ति होती है। “हे गुरुदेव, तुमको नमन, आ गया मैं तुम्हारी शरण” भजन हमें यह सिखाता है कि जब हम अहंकार त्यागकर गुरुचरणों में समर्पित होते हैं, तब हमारा जीवन सही दिशा में अग्रसर होता है। ऐसे ही अन्य भक्तिपूर्ण भजनों जैसे “गुरु चरणों की महिमा अपार”, “गुरु बिना जीवन अधूरा”, “गुरु वाणी का प्रकाश”, और “गुरु कृपा से जीवन सफल” को पढ़ें और अपने हृदय को भक्ति से भर लें। ????

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