गुरु का सुमिरन आत्मा को शुद्ध करता है और हमें आध्यात्मिक शांति की ओर ले जाता है। जब भी हम अपने अंतरमन में गुरु का ध्यान करते हैं, तो उनकी कृपा हमें हर संकट से उबारती है। “अपने अंतरमन में गुरु का सुमिरन कर ले” भजन इसी भाव को प्रकट करता है, जो हमें गुरुदेव के चरणों में अटूट श्रद्धा और प्रेम से जोड़ता है।
Apne Anterman Me Guru Ka Sumiran Kar Le Bhajan Lyrics
अपने अंतरमन में,
गुरु का सुमिरन कर ले,
फिर सँवर जाएगी,
ये तेरी जिन्दगी।।
ध्यान चरणों में गुरु के,
लगाते रहो,
सेवा करते रहो,
किरपा पाते रहो,
हर लेंगे अज्ञान तेरा,
परकाश ज्ञान की भर देंगे,
फिर सँवर जाएगी,
ये तेरी जिन्दगी।।
चाहो मुक्ति तो सद्गुरु,
बना लीजिए,
गुरु से आज्ञा ले जीवन में,
काम कीजिए,
जन्म-मरण के बंधन से,
छुटकारा दिलवायेंगे,
फिर सँवर जाएगी,
ये तेरी जिन्दगी।।
जाने किस पुण्य से ये,
नर तन मिला,
गुरु की किरपा से उजड़ा,
चमन ये खिला,
“परशुराम”तू सौंप गुरु को,
जीवन की पतवार को,
फिर सँवर जाएगी,
ये तेरी जिन्दगी।।
अपने अंतरमन में,
गुरु का सुमिरन कर ले,
फिर सँवर जाएगी,
ये तेरी जिन्दगी।।
गुरु का स्मरण ही सच्ची साधना है, जो हमें जीवन के हर कठिन मोड़ पर राह दिखाता है। “अपने अंतरमन में गुरु का सुमिरन कर ले” जैसे भजनों का पठन और मनन हमें आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाता है। यदि आपको यह भजन प्रेरणादायक लगा, तो “गुरु की महिमा कोई ना जाने”, “सतगुरु शरण में सभी फल मिलेंगे”, “गुरुवर तुमसे इतना कहना चरणों में तुम्हरे रहना”, और “हे गुरुवर तव चरण कमल में श्रद्धा सुमन चढ़ाते हैं” भजनों को भी अवश्य पढ़ें और गुरुदेव की कृपा का अनुभव करें।