तेल सिंदूर से लिपट गये है पवन पुत्र हनुमान भजन लिरिक्स

तेल सिंदूर से लिपट गये हैं पवन पुत्र हनुमान भजन हनुमान जी की महानता और भक्ति के प्रति उनके समर्पण का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है। यह भजन हनुमान जी के प्रति श्रद्धा और उनके अद्वितीय शक्ति को उजागर करता है। उनके शरीर पर तेल और सिंदूर की लाली को प्रतीक रूप में दर्शाते हुए यह भजन हमें याद दिलाता है कि हनुमान जी न केवल महान योद्धा हैं, बल्कि वे अपने भक्तों के प्रति अपने असीमित प्रेम और भक्ति का भी प्रतीक हैं।

Tel Sindoor Se Lipat Gaye Hai Pavan Putra Hanuman

तेल सिंदूर से लिपट गये है,
पवन पुत्र हनुमान
देख जानकी कहने लगी है,
ये क्या किया हनुमान।।

माता तुमने स्वामी धर्म का,
पालन जबसे बताया
मैंने राम भक्त बनकर,
बदन सिंदूर चढ़ाया
बना रहुँगा दास राम का,
भक्ति रुप समाया
लगी रहेगी प्रीत राम से,
मेरे पालन हार
देख जानकी कहने लगी है,
ये क्या किया हनुमान
तेल सिंदूर से लिपट गये है,
पवन पुत्र हनुमान
देख जानकी कहने लगी है,
ये क्या किया हनुमान।।

मंद मंद मुस्काए राम ने,
ये दिया वरदान
तेल सिंदूर तुझे चढ़ा के,
धरेगे तेरा ध्यान
मन की मुरादे पूरी होगी,
जो लेगा तेरा नाम
देख जानकी कहने लगी है,
ये क्या किया हनुमान
तेल सिंदूर से लिपट गये है,
पवन पुत्र हनुमान
देख जानकी कहने लगी है,
ये क्या किया हनुमान।।

तेल सिंदूर से लिपट गये है,
पवन पुत्र हनुमान
देख जानकी कहने लगी है,
ये क्या किया हनुमान।।

हनुमान जी के तेल और सिंदूर से सजे रूप में भक्ति का सबसे सशक्त प्रतीक देखा जाता है। उनके शरीर पर सिंदूर का तिलक और तेल का अभिषेक उनकी तपस्या और भक्ति का प्रतीक है। यह भजन हमें उनके प्रति प्रेम, श्रद्धा और समर्पण को बढ़ाने की प्रेरणा देता है। भक्तों का विश्वास और भक्ति पवन पुत्र को सर्वशक्तिमान बना देती है, और उनके आशीर्वाद से हर संकट दूर हो जाता है। जय श्री राम! जय हनुमान!

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