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भोला से बन गए भोली घुँघटा निकाल के लिरिक्स

शिव और शक्ति की लीला अद्भुत है, जहाँ भोलेनाथ स्वयं भी अपनी माया से अछूते नहीं रहते। भोला से बन गए भोली घुँघटा निकाल के भजन शिवजी के अनोखे रूप और उनकी लीलाओं का वर्णन करता है। यह भजन उनकी अलौकिक महिमा को उजागर करता है और भक्तों को उनकी भक्ति में मग्न होने का अवसर देता है। आइए, इस भक्तिमय भाव को पढ़कर शिव की भक्ति में डूबें।

Bhole Se Ban Gaye Bholi Ghunghat Nikal Ke

सिर पे ओ भोले अपने,
चुनरिया डाल के
भोला से बन गए भोली,
घुँघटा निकाल के।।

ये तो बता दो कहा छुपेगी,
ये कंठी ये माला
ये कंठी ये माला,
कहां छुपाओ भोले अपनी
ये सर्पो की माला,
ये सर्पो की माला
इनको तो गौरा मेरी,
झोली में डाल दे
भोला से बन गए भोलीं,
घुँघटा निकाल के।।

ये तो बता दो कहा छुपेगा,
ये गंगा का पानी
ये गंगा का पानी,
मर्दानी आवाज को भोले
कैसे करोगे जनानी,
कैसे करोगे जनानी
मुख पे तू गोरा मेरे,
घुँघट बस डाल दे
भोला से बन गए भोलीं,
घुँघटा निकाल के।।

खबर पड़ी जब नंदलाला को,
नंदलाला मुस्काये
नंदलाला मुस्काये,
सब तो आये बिन घूंघट के,
ये घूंघट में आये
ये घूंघट में आये,
पाले पड़े हो भोले,
आज नंदलाल के
भोला से बन गए भोलीं,
घुँघटा निकाल के।।

घूंघट पलट दिया कान्हा ने,
भोलेनाथ मुस्काये
भोलेनाथ मुस्काये,
उसी समय पर भोले दानी,
गोपेश्वर कहलाये
गोपेश्वर कहलाये,
औघड़ दानी है भोले,
पर है कमाल के
भोला से बन गए भोलीं,
घुँघटा निकाल के।।

सिर पे ओ भोले अपने,
चुनरिया डाल के
भोला से बन गए भोली,
घुँघटा निकाल के।।

शिव की हर लीला भक्तों को मोह लेती है और उनकी भक्ति में और अधिक डूबने को प्रेरित करती है। उनकी महिमा और भक्ति का रस लेने के लिए मेरी फरियाद सुन भोले तेरे दर आया दीवाना, भरोसा महाकाल का, ओ भोले हम तो लुट गए तेरे प्यार में, और जहाँ जिनकी जटाओं में गंगा की बहती अविरल धारा जैसे अन्य भजनों को भी अवश्य पढ़ें और शिव भक्ति में लीन हो जाएं। ????????

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