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बाबा खाटू का तेरा दाल चूरमा मन लालचावे रे

बाबा खाटू का तेरा दाल चूरमा मन लालचावे रे भजन श्याम बाबा के पावन भोग और उनके प्रसाद की महिमा का गुणगान करता है। खाटू धाम में मिलने वाला दाल-चूरमा केवल एक व्यंजन नहीं, बल्कि भक्तों के लिए बाबा की कृपा का प्रतीक है। श्रद्धालु इसे प्रेम और भक्ति के साथ ग्रहण करते हैं, क्योंकि यह बाबा का प्रसाद होता है, जो जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद लाता है। आइए, इस भजन को पढ़कर श्याम बाबा की भक्ति में रम जाएं।

Baba Khatu Ka Tera Daal Churma Man Lalchave Re

बाबा खाटू का तेरा दाल चूरमा मन लालचावे रे,
हार गए सारे हलवाई बना ना पावे रे,
बाबा खाटू का….

खाटू गाव का पानी तेरा गंगाजल सा काम करे,
दुर-दुर तक देशी घी की, खुशबू आवे रे,
बाबा खाटू का ……

सवामणी बनवा कर बाबा, तेरे भोग लगावे जी,
भगता साग मार सबदका, जी भर खावे जी,
बाबा खाटू का…….

बर्फी तेरा और कलाकंद सारे फीके पार हो गए जी,
दूध, मलाई, रबड़ी अब तो, याद ना आवे रे,
बाबा खाटू का …….

“बनवारी” कुछ ऐसा कर दे, बाराहो महीना खावे जी,
दाल-चूरमा खाखा कर के, भजन सुनावे जी,
बाबा खाटू का………

श्याम बाबा का भोग केवल भोजन नहीं, बल्कि उनकी कृपा और प्रेम का अमृत है, जिसे पाकर हर भक्त धन्य हो जाता है। “बाबा खाटू का तेरा दाल चूरमा मन लालचावे रे” भजन भी इसी प्रेम और श्रद्धा को प्रकट करता है। श्याम प्रेम और उनकी कृपा का अनुभव करने के लिए कभी तेरी चौखट ना छोडेंगे हम, खाटू की रज को समझो ना बालू, बिखर गया हूँ बाबा, और थे म्हारा सरकार, म्हारा खाटू वाला श्याम भजन भी पढ़ें और श्याम जी की भक्ति में रम जाएं।

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