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होली खेला भेरुजी रे लार

भक्ति और उत्सव का जब संगम होता है, तब आनंद की सीमा नहीं रहती। होली खेला भेरुजी रे लार भजन नाकोड़ा भैरव जी की भक्ति में रंगे भक्तों की उमंग और श्रद्धा को प्रकट करता है। यह भजन भैरव दादा के प्रति प्रेम और समर्पण का प्रतीक है, जहां भक्त उनकी महिमा का गुणगान करते हुए होली के रंगों में डूब जाते हैं। जब भक्ति का रंग चढ़ता है, तब जीवन में हर रंग शुभ और मंगलमय बन जाता है।

Holi Khela Bheruji Re Lar

आयो फगणियो आपा,
होली खेला भेरुजी रे लार,
आयो फ़ागणियो,
उड़ रहियो लाल,
गुलाल यो देखो,
नाकोड़ा दरबार,
आयो फ़ागणियो।1।

मेवानगर री पहाड़ियों में,
सजधज करके बेठिया रे,
भेरूजी रा भगत कर रहिया,
रंगों री बौछार,
आयो फ़ागणियो।2।

हाथो में गुलाल ओर,
रंग भरी पिचकारी रे,
दादा रे दरबार मे देखो,
भगतो री भरमार,
आयो फ़ागणियो।3।

माँ अम्बे रा लाल ने,
करदयो लालम लाल जी,
खेल रहिया भक्तो संग होली,
भेरूजी सरकार,
आयो फ़ागणियो।4।

नाकोड़ा में होली खेलके,
भगता हुया दीवाना जी,
हर बरस नाकोड़ा आकर,
उड़ावे रंग गुलाल,
आयो फ़ागणियो।5।

आई रुत मतवाली देखो,
बाज रहिया है चंग जी,
ढोलक ढोल मंजीरा बाजे,
झाँझर री झणकार,
आयो फ़ागणियो।6।

नाकोड़ा में होली ‘दिलबर’,
भगता गावे धमाल जी,
भेरूजी संग होली खेले,
टुकलिया परिवार,
आयो फ़ागणियो।7।

आयो फगणियो आपा,
होली खेला भेरुजी रे लार,
आयो फ़ागणियो,
उड़ रहियो लाल,
गुलाल यो देखो,
नाकोड़ा दरबार,
आयो फ़ागणियो।8।

जैन जी के भजन हमें भक्ति और आनंद के रंगों में रंगने की प्रेरणा देते हैं। “होली खेला भेरुजी रे लार” भजन भी हमें यह अहसास कराता है कि जब हम नाकोड़ा भैरव जी की भक्ति में मग्न होते हैं, तो हर त्योहार एक दिव्य उत्सव बन जाता है। यदि यह भजन आपके मन में भक्ति का रंग घोल दे, तो “नाकोड़ा भैरव जी की अपार कृपा , जय हो भैरव बाबा की , भक्तों के संकट हरने वाले भैरव” और “नाकोड़ा जी का चमत्कारी दरबार” जैसे अन्य भजन भी पढ़ें और नाकोड़ा भैरव जी की भक्ति में रंग जाएं। ????

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