ऊँचे पर्वत पे बैठी माँ राह दिखाती है

माँ की महिमा अपरंपार है, वे सृष्टि की पालनहार हैं और अपने भक्तों को सदा सही मार्ग दिखाती हैं। “ऊँचे पर्वत पे बैठी माँ राह दिखाती है” भजन इसी भाव को प्रकट करता है, जहाँ माँ की कृपा से हर संकट दूर हो जाता है और जीवन में सही दिशा मिलती है। माँ केवल पर्वतों पर नहीं, बल्कि भक्तों के हृदय में भी विराजमान रहती हैं और अपने आशीर्वाद से उनका जीवन संवारती हैं। आइए, इस भजन के माध्यम से माँ के दिव्य स्वरूप को नमन करें।

Unche Parvat Pe Baithi Maa Rah Dikhati Hai

ऊँचे पर्वत पे बैठी माँ,
राह दिखाती है,
चलो चलो माँ शेरावाली,
हमें बुलाती है,
चलो चलो माँ शेरावाली,
हमें बुलाती है।1।

हसंते हँसते नाचते गाते,
माँ से मिलने जायेंगे,
वैष्णो माता के चरणों में,
दिल क्या सर भी झुकायेंगे,
देखो सारे बच्चो पे माँ,
प्यार लुटाती है,
चलो चलो माँ शेरावाली,
हमें बुलाती है।2।

तेरी इस मुट्ठी में ऐ माँ,
ये सारा संसार है,
माँ भी मेरी प्यारी है और,
प्यारा सा दरबार है,
जब भी कोई संकट आये,
हमें बचाती है,
चलो चलो माँ शेरावाली,
हमें बुलाती है।3।

ऊँचे पर्वत पे बैठी माँ,
राह दिखाती है,
चलो चलो माँ शेरावाली,
हमें बुलाती है,
चलो चलो माँ शेरावाली,
हमें बुलाती है।4।

माँ अपने भक्तों की हर पुकार सुनती हैं और उन्हें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाती हैं। “ऊँचे पर्वत पे बैठी माँ राह दिखाती है” भजन माँ के उस मार्गदर्शन और अटूट कृपा को दर्शाता है। यदि यह भजन आपको माँ की भक्ति में डूबो देता है, तो “तेरी भेटें गाता रहूं तेरे जगरातों में” भजन भी अवश्य सुनें, जिसमें माँ के जगरातों में उनकी महिमा गाने की भक्तिपूर्ण भावना व्यक्त की गई है।

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