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तू हरि को ना भजेगा भव कैसे पार होगा

जीवन अनमोल है, और इसे व्यर्थ चिंताओं में गंवाने के बजाय हमें प्रभु स्मरण में लगाना चाहिए। तू हरि को ना भजेगा भव कैसे पार होगा भजन हमें यह याद दिलाता है कि संसार रूपी सागर से पार पाने के लिए भगवान का भजन और सतगुरु का सान्निध्य ही एकमात्र उपाय है। आइए, इस भजन के माध्यम से प्रभु भक्ति की राह पर आगे बढ़ें।

Tu Hari Ko Na Bhajega Bhav Kaisa Paar Hoga

तू हरि को ना भजेगा,
भव कैसे पार होगा,
भव कैसे भव कैसे,
भव कैसे पार होगा,
तू हरि को ना भजेगा।।

मिट जाएगा ये एक दिन,
इस तन पर तू न इतरा,
जिस काम से तू आया,
उसको क्यो है तू बिसरा,
जो चला गया तू यूँ ही,
सोचो क्या हाल होगा,
तू हरि को ना भजेगा।।

अवसर मिला है हमको,
उसको न अब गवाँना,
जो किया नही भजन तो,
सत गुरू को न लजाना,
जैसे जहाँ मे आया,
वैसे ही जाना होगा,
तू हरि को ना भजेगा।।

गुरु तो दयालू होते,
हो जाए शरणागत जो,
गुरूदेव की दया से,
पाएगा चरणो रज वो,
जो भजेगा नाम मन तो,
आँनन्द अपार होगा,
तू हरि को ना भजेगा।।

तू हरि को ना भजेगा,
भव कैसे पार होगा,
भव कैसे भव कैसे,
भव कैसे पार होगा,
तू हरि को ना भजेगा।।

हरि नाम का सुमिरन ही हमें सभी दुखों से मुक्त कर सकता है और मोक्ष की ओर ले जा सकता है। यदि यह भजन आपको प्रेरणादायक लगा, तो “हरि नाम सुमर ले बन्दे जीवन को सफल बना ले”, “भजले नाम गुरु का रे मनवा बीत रही है स्वाँसा”, “गुरुदेव मेरे गुरुदेव मेरे”, और “स्वाँस बीती जाए उमर बीती जाए” भजन भी पढ़ें और भक्ति मार्ग को अपनाएं।

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