सर ते तान के दुपट्टा सुहे रंग दा नी माए मेरे ऐब ढक ले

माँ की ममता अनंत है, वह अपने भक्तों की हर कमजोरी, हर गलती को अपने स्नेह के आँचल में छिपा लेती है। “सर ते तान के दुपट्टा सुहे रंग दा नी माए, मेरे ऐब ढक ले” भजन भक्त की उस गहरी भावना को प्रकट करता है, जिसमें वह माँ से अपने सभी दोषों को क्षमा करने और अपनी ममता की छांव में शरण देने की प्रार्थना करता है। माँ का लाल चुनरी रूपी आशीर्वाद भक्तों को हर संकट से बचा लेता है और उन्हें नया जीवन प्रदान करता है।

Sir Te Taan Ke Dupatta Suhe Rang Da Ni Maye Aib Dhak Le

सर ते तान के दुपट्टा सुहे रंग दा,
नी माए मेरे ऐब ढक ले,
कोई हार फूलन दा लाया हैं,
किस्से नारियल भेंट चढ़ाया हैं,
रंगवा के दुपट्टा सुहे रंग दा,
तेरा लाल तेरे दर आया हैं,
सिर ते तान के दुपट्टा सुहें रंगदा,
नी माए मेरे ऐब ढक ले।1।

मैनु हैं तेरी बेपरवहियां ते भरोसा,
मैनु मेरे गुनाहें दी मां तू सजा ना दी,
जो सुख तेरे दर ते मिला वो काशी नाम के,
थक हार के तेरे दर ते ए नजारे तके,
सिर ते तान के दुपट्टा सुहें रंगदा,
नी माए मेरे ऐब ढक ले।bd।

ए माँ गल नाल लाले पुत नू,
रो रो वास्ते पावा,
रहम दा सागर दिल है तेरा,
ते मावा ठंडिया छावां,
सिर ते तान के दुपट्टा सुहें रंगदा,
नी माए मेरे ऐब ढक ले।bd।

बस तेरी दया ही ला सकती है मां,
कखा नू भी आखां,
क्यों ना तेरे दर ते माये,
मैं भी भरोसा रखा,
भूलिया रेआ मैं सारी उमर,
हूण नाम दा अमृत चखा,
तेरे ड्योडी ते सिर रख के माता,
किते तर जाए पापी लख्खा,
सिर ते तान के दुपट्टा सुहें रंगदा,
नी माए मेरे ऐब ढक ले।bd।

सर ते तान के दुपट्टा सुहे रंग दा,
नी माए मेरे ऐब ढक ले,
कोई हार फूलन दा लाया हैं,
किस्से नारियल भेंट चढ़ाया हैं,
रंगवा के दुपट्टा सुहे रंग दा,
तेरा लाल तेरे दर आया हैं,
सिर ते तान के दुपट्टा सुहें रंगदा,
नी माए मेरे ऐब ढक ले।।

“सर ते तान के दुपट्टा सुहे रंग दा नी माए, मेरे ऐब ढक ले” भजन माँ की असीम करुणा और उनके पावन आशीर्वाद को दर्शाता है। माँ का आँचल ही वह सुरक्षा कवच है, जो भक्तों को हर विपत्ति से बचाता है। माँ की इस अपार कृपा को और अधिक महसूस करने के लिए “[माँ तेरी चुनरी का है साया सबसे प्यारा]” जैसे भजन भी श्रद्धा और भक्ति की भावना को और प्रगाढ़ करते हैं। जय माता दी! ????????

Leave a comment