श्री बालाजी महाराज तेरे माथे मुकुट एक भक्ति भरा भजन है जो श्री बालाजी की महिमा और उनकी दिव्यता को वर्णित करता है। इस भजन में भक्त श्री बालाजी महाराज के तेजस्वी रूप और उनके आशीर्वाद की प्रार्थना करते हैं। भजन के माध्यम से भक्त भगवान के विशाल रूप, उनके माथे पर स्थित मुकुट की महिमा, और उनके द्वारा दिए गए आशीर्वाद की असीम शक्ति को महसूस करते हैं। यह भजन भक्तों को श्री बालाजी के प्रति अपार श्रद्धा और विश्वास में डुबोता है, जिससे जीवन की हर चुनौती को पार करने का साहस मिलता है।
Shri Balaji Maharaj Tere Mathe Mukut
श्री बालाजी महाराज महाराज,
तेरे माथे मुकुट बिराज रहो ।।
श्लोक
लाल देह लाली लसे, अरु धरि लाल लँगूर,
बज्र देह दानव दलन, जय जय जय कपि सूर।।
श्री बालाजी महाराज महाराज,
तेरे माथे मुकुट बिराज रहो ।।
तेरे माथे मुकुट बिराज रहो,
तेरे माथे मुकुट बिराज रहो।
श्री बालाजी महाराज महाराज,
तेरे माथे मुकुट बिराज रहो ।।
तोपे सिंदूर चढे तोपे फूल चढे,
तोपे सिंदूर चढे तोपे फूल चढे।
तोपे चढे तेल की धार ओ धार,
तेरे माथे मुकुट बिराज रहो ।।
तेरा लाल लंगोट का चोला हे,
तेरा लाल लंगोट का चोला हे।
तेरे ध्वजा हाथ में लाल ओ लाल,
तेरे माथे मुकुट बिराज रहो ।।
तेरे कानन कुंडल सोह रहे,
तेरे कानन कुंडल सोह रहे।
मस्तक पे तिलक लाल ओ लाल,
तेरे माथे मुकुट बिराज रहो ।।
जो आवे तेरे दर्शन को,
जो आवे तेरे दर्शन को।
वांको हो जाय बेड़ो पार ओ पार,
तेरे माथे मुकुट बिराज रहो ।।
तेरो दास पड़ियो हे चरनन में,
तेरो दास पड़ियो हे चरनन में।
एक तेरो ही आधार आधार,
तेरे माथे मुकुट बिराज रहो ।।
श्री बालाजी महाराज महाराज,
तेरे माथे मुकुट बिराज रहो ।।
श्री बालाजी महाराज के आशीर्वाद से हम अपने जीवन की हर मुश्किल से पार पा सकते हैं। श्री बालाजी महाराज तेरे माथे मुकुट भजन में जैसे उनके दिव्य रूप और आशीर्वाद का गुणगान किया गया है, वैसे ही हर भजन में श्री बालाजी की शक्ति, करुणा और उनके भक्तों के प्रति असीम प्रेम को महसूस किया जा सकता है। हनुमान जी और अन्य भगवानों के भजन जैसे राम जी के साथ जो हनुमान नहीं होते भी हमें आस्था और विश्वास से भरते हैं, क्योंकि भगवान का हर रूप हमें सुख, शांति और आशीर्वाद देता है। श्री बालाजी महाराज की कृपा से हम जीवन के हर मोड़ पर आगे बढ़ सकते हैं।