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शंकर मेरे जगत पिता है पारवती मेरी माता भजन लिरिक्स

शंकर मेरे जगत पिता हैं पारवती मेरी माता यह भजन भोलेनाथ और माता पार्वती के दिव्य स्वरूप को मात-पिता के रूप में भावपूर्ण समर्पण से वर्णित करता है। पंडित सत्य प्रकाश जी द्वारा प्रस्तुत यह रचना हर भक्त के मन में उस गहरे भाव को जाग्रत करती है कि जब संसार के संबंध अस्थायी हो सकते हैं, तब शिव और पार्वती जैसे दिव्य माता-पिता सदा अपने भक्तों के साथ रहते हैं।

Shankar Mere Jagat Pita Hai Parvati Meri Mata Bhajan Lyrics

शंकर मेरे जगत पिता है,
पारवती मेरी माता,
पारवती मेरी माता।।

दर तेरे आता हूँ,
आरती गाता हूँ,
चरणों में तेरे,
धोक लगाऊं,
दर्श तेरा मैं चाहता,
क्यों ना तरस तुझे आता,
तुम बिन मेरा कौन सहारा,
पारवती मेरी माता,
पारवती मेरी माता।।

अवगुण चित ना धरो,
सिर पर हाथ धरो,
मैं हूँ पापी और दुष्कर्मी,
खोल ना मेरा खाता,
सुनले जग के विधाता,
मेरी नैया डगमग डोले,
क्यों नहीं पार लगाता,
पारवती मेरी माता,
पारवती मेरी माता।।

धीर बंधाओ ना,
हाथ फिराओ ना,
नैनो से बहे जल की धारा,
क्यों ना तरस तुझे आता,
मुझसे नहीं क्या नाता,
किस दर जाऊं किसको सुनाऊँ,
दुःख से भरी ये गाथा,
पारवती मेरी माता।।

शंकर मेरे जगत पिता है,
पारवती मेरी माता,
पारवती मेरी माता।।

“शंकर मेरे जगत पिता हैं पारवती मेरी माता” भजन को पढ़कर मन भावविभोर हो उठता है और श्रद्धा से भर जाता है। शिव-पार्वती के इस स्नेहिल रूप की भक्ति से जीवन में स्थिरता, शांति और आशीर्वाद प्राप्त होता है। यदि आपको यह भजन भावपूर्ण लगा हो, तो आप “शिव मात-पिता शिव बंधु सखा”, “मेरे भोले बाबा निराली तेरी शान है”, “भोले तेरी निराली शान करे जगत का तू कल्याण”, और “हे शिव शंकर भक्ति की ज्योति अब तो जला दो मन में” जैसे अन्य शिव भजनों को भी अवश्य पढ़ें। ये सभी रचनाएँ शिवभक्ति के मार्ग को और भी उज्जवल बनाती हैं।

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