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साधन पे कभी न तू मन किया गौर गुरू बिन नही

संसार में सुख, वैभव और साधनों की कोई कमी नहीं, लेकिन इनके होने के बावजूद भी आत्मिक शांति दुर्लभ रहती है। इसका कारण यही है कि बिना गुरु के मार्गदर्शन के कोई भी सच्चे आनंद को प्राप्त नहीं कर सकता। साधन पे कभी न तू मन किया गौर गुरू बिन नही भजन हमें यह सिखाता है कि गुरु की कृपा के बिना जीवन अधूरा है और मोक्ष का मार्ग कठिन है।

Sadhan Pe Kabhi Na Tu Man Kiya Gaur Guru Bin Nahi

साधन पे कभी न,
तू मन किया गौर,
गुरू बिन नही पाएगा मनवा,
तू जग में ठौर।।

गुरू बिन ऐसा कोई नही है,
जो तुझको भव पार कराए,
ऐसा हमदम,
कही न मिलेगा,
जो तुझको सही राह दिखाए,
सच्चा हितेषी जग में,
गुरू बिन नही कोई और,
गुरू बिन नही पाएगा मनवा,
तू जग में ठौर।।

सौंप दे सतगुरु के चरणो मे,
अपने जीवन की तू नैया,
गुरु को रिझाले,
अपना बनाले,
श्री सतगुरू को अपना खिवैया,
चल तू उस रस्ते पे,
ले जाए गुरू जिस ओर,
गुरू बिन नही पाएगा मनवा,
तू जग में ठौर।।

नाम निरँतर ध्याले मनवा,
क्यो जग में तू स्वाँस गँवाए,
गुरूवाणी को अमल मे लाओ,
समय अनोखा,
बीता जाए,
जग से ध्यान हटा कर,
लगाओ गुरू की ओर,
गुरू बिन नही पाएगा मनवा,
तू जग में ठौर।।

साधन पे कभी न,
तू मन किया गौर,
गुरू बिन नही पाएगा मनवा,
तू जग में ठौर।।

गुरु ही जीवन को सार्थक दिशा देते हैं और हमें आत्मिक उन्नति की ओर ले जाते हैं। इसलिए हमें अपने साधनों पर गर्व करने के बजाय गुरु के चरणों में समर्पित होना चाहिए। आगे “तुझे गुरु कितना समझाए पर तेरी समझ न आए”, “हरि नाम सुमरले बंदे जीवन को सफल बना ले”, “सोए को संत जगाए फिर नींद न उसको आए”, और “माटी के पुतले रे तेरा अपना यहाँ नहीं कोई” भजन भी पढ़ें और गुरु वचनों का अनुसरण करें।









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