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रे मन मूर्ख कब तक जग में जीवन व्यर्थ बिताएगा

जीवन अनमोल है, लेकिन अक्सर हम इसे माया-मोह में व्यर्थ गंवा देते हैं। यह भजन रे मन मूर्ख कब तक जग में जीवन व्यर्थ बिताएगा हमें आत्मचिंतन करने और प्रभु श्रीराम की भक्ति में समय व्यतीत करने की प्रेरणा देता है। यह भजन हमारे मन को झकझोरता है और सत्य की ओर अग्रसर करता है कि जीवन का असली सार प्रभु की शरण में ही है।

Re Man Murakh Kab Tak Jag Me Jeevan Vyarth Bitayega

रे मन मूर्ख कब तक जग में,
जीवन व्यर्थ बिताएगा,
राम नाम नहीं गाएगा तो,
अंत समय पछताएगा।1।

जिस जग में तू आया यह,
एक मुसाफिर खाना है,
सिर्फ़ रात भर रुकना इसमें,
सुबह सफ़र पर जाना है,
लेकिन यह भी याद रहे,
श्वासों का पास खजाना है,
जिसे लूटने को कामादिक,
चोरों ने प्रण ठाना है,
माल लुटा बैठा तो घर जा,
कर क्या मुँह दिखलाएगा,
राम नाम नहीं गाएगा तो,
अंत समय पछताएगा।2।

शुद्ध न की वासना हृदय की,
बुद्धि नहीं निर्मल की है,
झूठी दुनियादारी से क्या,
आशा मोक्ष के फल की है,
तुझको क्या है खबर तेरी,
ज़िंदगी कितने पल की है,
यम के दूत घेर लेंगे तब,
तू क्या धर्म कमाएगा,
राम नाम नहीं गाएगा तो,
अंत समय पछताएगा।3।

पहुँच गुरु के पास ज्ञान का,
दीपक का उजियाला ले,
कंठी पहन कंठ जप की,
कर सुमिरन की माला ले,
खाने को दिलदार रूप का,
रसमय मधुर निवाला ले,
पीने को प्रीतम प्यारे के,
प्रेमतत्व का प्याला ले,
यह ना किया तो ‘बिन्दु’,
नीर आँखों से बहाएगा,
राम नाम नहीं गाएगा तो,
अंत समय पछताएगा।4।

रे मन मूर्ख कब तक जग में,
जीवन व्यर्थ बिताएगा,
राम नाम नहीं गाएगा तो,
अंत समय पछताएगा।5।

मोह-माया में उलझा मन अक्सर वास्तविक सत्य को भूल जाता है, लेकिन श्रीराम की भक्ति हमें सच्चे आनंद और शाश्वत शांति की ओर ले जाती है। इस भजन के माध्यम से हम अपने जीवन को सार्थक बनाने का संदेश पाते हैं। ऐसे ही अन्य भजन राम का गुणगान करिए, राम के थे राम के हैं हम राम के रहेंगे, राम नाम का सुमिरन कर ले खुश होंगे हनुमान रे और कभी तो अपनी कुटिया में भी राम आएंगे को भी पढ़ें और अपने मन को प्रभु की भक्ति में लगाएं। ???? जय श्रीराम! ????

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