Teri Puja Me Man Leen Rahe Mera Mastak Ho Aur Dwar Tera
तेरी पूजा मे मन लीन रहे,
मेरा मस्तक हो और द्वार तेरा,
मीट जाये जन्मों की तृष्णा,
श्री राम मिले जो प्यार तेरा।।
तुझमे खोकर जीना है मुझे,
मै बूँद हूँ तु इक सागर है,
तुझ बिन जीवन का अर्थ है क्या,
मै तारा हूँ तु अम्बर है,
तुने मुझको स्वीकार किया,
क्या कम है ये उपकार तेरा,
तेरी पुजा मे मन लीन रहे,
मेरा मस्तक हो और द्वार तेरा।।
यूँ मुझको तेरा प्यार मिला,
बेजान को जेसे जान मिली,
जिस दिन से तुझको जाना है,
मुझको मेरी पहचान मिली,
देदी तुने चरणों मे जगह,
क्या कम है ये उपकार तेरा,
तेरी पुजा मे मन लीन रहे,
मेरा मस्तक हो और द्वार तेरा।।
तेरी पूजा मे मन लीन रहे,
मेरा मस्तक हो और द्वार तेरा,
मीट जाये जन्मों की तृष्णा,
श्री राम मिले जो प्या

मैं आचार्य ब्रह्मदत्त, सनातन धर्म का एक साधक और आध्यात्मिक ज्ञान का प्रचारक हूँ। मेरा जीवन देवी-देवताओं की आराधना, वेदों-पुराणों के अध्ययन और भक्ति मार्ग के अनुसरण में समर्पित है। सूर्य देव, खाटू श्याम, शिव जी और अन्य देवी-देवताओं की महिमा का गुणगान करना मेरे लिए केवल एक लेखन कार्य नहीं, बल्कि एक दिव्य सेवा है। मैं अपने लेखों के माध्यम से भक्तों को पूजन विधि, मंत्र, स्तोत्र, आरती और धार्मिक ग्रंथों का ज्ञान सरल भाषा में प्रदान करने का प्रयास करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने आध्यात्मिक पथ को सुगम और सार्थक बना सके। View Profile