Ram Mere Ghar Aana Chitrakut Ke Ghat Ghat Par
राम मेरे घर आना,
दोहा – चित्रकूट के घाट पर,
भई संतन की भीड़…
तुलसीदास चन्दन घिसे,
तिलक करे रघुवीर।।
चित्रकूट के घाट घाट पर,
भीलनी जोवे बाट…
राम मेरे घर आना, राम मैरे घर आना।।
आसन नही है रामा कहाँ मैं बिठाऊँ,
कहाँ मैं बिठाऊँ रामा,
कहाँ मैं बिठाऊँ…
टूटी पड़ी है खाट,
खाट पे बिछा पुराना टाट,
राम मैरे घर आना, राम मैरे घर आना।।
भोजन नही है रामा क्या मैं जिमाऊ,
क्या मैं जिमाऊ रामा,
क्या मैं जिमाऊ…
ठंडी पड़ी है घाट,
घाट में डालु ठंडी छाछ,
राम मैरे घर आना, राम मैरे घर आना।।
मेवा नही है रामा क्या मैं चढ़ाऊँ,
क्या मैं चढ़ाऊँ रामा,
क्या मैं चढ़ाऊँ,
छोटे बड़े है पेड़…
पेड़ पे लगे हुए है बेर,
राम मैरे घर आना, राम मैरे घर आना।।
झूला नही रामा काहे में झुलाऊँ,
काहे में झुलाऊँ रामा,
काहे में झुलाऊँ…
हरे भरे है पेड़,
पेड़ पर झूले सीताराम,
राम मैरे घर आना, राम मैरे घर आना।।
चित्रकूट के घाट घाट पर,
भीलनी जोवे बाट…
राम मैरे घर आना, राम मैरे घर आना।।

मैं आचार्य ब्रह्मदत्त, सनातन धर्म का एक साधक और आध्यात्मिक ज्ञान का प्रचारक हूँ। मेरा जीवन देवी-देवताओं की आराधना, वेदों-पुराणों के अध्ययन और भक्ति मार्ग के अनुसरण में समर्पित है। सूर्य देव, खाटू श्याम, शिव जी और अन्य देवी-देवताओं की महिमा का गुणगान करना मेरे लिए केवल एक लेखन कार्य नहीं, बल्कि एक दिव्य सेवा है। मैं अपने लेखों के माध्यम से भक्तों को पूजन विधि, मंत्र, स्तोत्र, आरती और धार्मिक ग्रंथों का ज्ञान सरल भाषा में प्रदान करने का प्रयास करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने आध्यात्मिक पथ को सुगम और सार्थक बना सके। View Profile