Mujhe Tera Sahara Sada Chahiye
मुझे तेरा सहारा सदा चाहिए भजन,
आसरा इस जहाँ का मिले न मिले,
मुझे तेरा सहारा सदा चाहिए।।
चाँद तारे फलक पर दिखे ना दिखे,
मुझ को तेरा नज़ारा सदा चाहिए,
धन दौलत जहाँ की मिले ना मिले,
सतगुरु तेरे चरणों की रज चाहिए॥
यहाँ खुशिया हैं कम, और ज्यादा है गम,
जहाँ देखो वहीँ है देखो भरम ही भरम,
मेरी महफ़िल में शम्मा जले ना जले,
मेरे दिल में उजाला तेरा चाहिए॥
कभी वैराग है, कभी अनुराग है,
यहाँ बदले हैं माली वही बाग़ है,
मेरी चाहत की दुनिया बसे ना बसे,
मेरे दिल में बसेरा तेरा चाहिए॥
मेरी धीमी है चाल, और पथ है विशाल,
हर कदम पर मुसीबत अब तू ही संभाल,
पैर मेरे थकें हैं, चले ना चले,
मेरे दिल में इशारा तेरा चाहिए॥
कभी बैराग है, कभी अनुराग है,
जिन्दगी बिन धुंए की अजब आग है,
मान सम्मान जग में मिले ना मिले,
बस कृपा होनी बाबा तेरी चाहिए॥
आसरा इस जहाँ का मिले न मिले,
मुझे तेरा सहारा सदा चाहिए ॥

मैं आचार्य ब्रह्मदत्त, सनातन धर्म का एक साधक और आध्यात्मिक ज्ञान का प्रचारक हूँ। मेरा जीवन देवी-देवताओं की आराधना, वेदों-पुराणों के अध्ययन और भक्ति मार्ग के अनुसरण में समर्पित है। सूर्य देव, खाटू श्याम, शिव जी और अन्य देवी-देवताओं की महिमा का गुणगान करना मेरे लिए केवल एक लेखन कार्य नहीं, बल्कि एक दिव्य सेवा है। मैं अपने लेखों के माध्यम से भक्तों को पूजन विधि, मंत्र, स्तोत्र, आरती और धार्मिक ग्रंथों का ज्ञान सरल भाषा में प्रदान करने का प्रयास करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने आध्यात्मिक पथ को सुगम और सार्थक बना सके। View Profile