Main Kya Janu Ram Tera Gorakhdhandha
दोहा –
चलती चक्की को देखकर,
दिया कबीरा रोय,
दो पाटन के बिच में…
साबुत बचा ना कोई।
दाता थारे हाथ में,
और जिया जून की डोर,
चेत के चाल कबीरा,
देवे कौन जमारो खोर।
मै क्या जानू राम तेरा गोरखधंधा,
गोरखधंधा, गोरखधंधा,
गोरखधंधा राम…
मै क्या जानू राम तेरा गोरखधंधा।।
धरती और आकाश बिच में,
सूरज तारे चन्दा…
हवा बादलो बिच में वर्षा,
तामनी दंदा राम,
मै क्या जानू राम तेरा गोरखधंधा।।
एक चला जाये,
चार देते है कन्धा,
किसी को मिलती आग…
किसी को मिल जाये फंदा,
मै क्या जानू राम तेरा गोरखधंधा।।
कोई पड़ता घोर नरक,
कोई सुरगी संदा,
क्या होनी क्या अनहोनी…
नही जाने रे बंदा राम,
मै क्या जानू राम तेरा गोरखधंधा।।
कहे कबीर प्रगट माया,
फिर भी नर अँधा,
सब के गले में डाल दिया…
मोह माया का फंदा,
मै क्या जानू राम तेरा गोरखधंधा।।
मैं क्या जानू राम तेरा गोरखधंधा,
गोरखधंधा, गोरखधंधा…
गोरखधंधा राम,
मै क्या जानू राम तेरा गोरखधंधा।।

मैं आचार्य ब्रह्मदत्त, सनातन धर्म का एक साधक और आध्यात्मिक ज्ञान का प्रचारक हूँ। मेरा जीवन देवी-देवताओं की आराधना, वेदों-पुराणों के अध्ययन और भक्ति मार्ग के अनुसरण में समर्पित है। सूर्य देव, खाटू श्याम, शिव जी और अन्य देवी-देवताओं की महिमा का गुणगान करना मेरे लिए केवल एक लेखन कार्य नहीं, बल्कि एक दिव्य सेवा है। मैं अपने लेखों के माध्यम से भक्तों को पूजन विधि, मंत्र, स्तोत्र, आरती और धार्मिक ग्रंथों का ज्ञान सरल भाषा में प्रदान करने का प्रयास करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने आध्यात्मिक पथ को सुगम और सार्थक बना सके। View Profile