कभी तो अपनी कुटिया में भी राम आएंगे

हर राम भक्त की यही अभिलाषा होती है कि एक दिन प्रभु श्रीराम स्वयं उसकी कुटिया में पधारें और अपने दिव्य दर्शन से जीवन को कृतार्थ करें। कभी तो अपनी कुटिया में भी राम आएंगे भजन इसी भक्तिपूर्ण भावना को प्रकट करता है। जब माता शबरी ने प्रेम और श्रद्धा से राम जी की प्रतीक्षा की, तो प्रभु उनके झूठे बेर भी प्रेमपूर्वक ग्रहण कर लिए। यह भजन हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति और निःस्वार्थ प्रेम से ही भगवान को पाया जा सकता है। जब मन निर्मल और प्रेम से भरा होगा, तब राम अवश्य हमारी कुटिया में आएंगे।

Kabhi to Apni Kutiya Me Bhi Ram Aayenge

कुछ बेर चुनो नेकी के,
अपने काम आएंगे,
कभी तो अपनी कुटिया में भी,
राम आएंगे।1।

है कर्म हमारे अच्छे,
तो किस्मत अपनी दासी,
बस कर्म सुधारे अपना,
ये समझे बात जरा सी,
जो बोए पेड़ बबूल,
कहां से आम आएंगे,
कभी तों अपनी कुटियां में भी,
राम आएंगे।2।

तीरथ स्नान किए बस,
है तन का मैल छुड़ाया,
मन मैला अंत समय में,
फिर काहे को पछताया,
हम जैसा कर्म करें,
वैसे परिणाम आएंगे,
कभी तों अपनी कुटियां में भी,
राम आएंगे।3।

ये धर्म कर्म दो पहिए,
जीवन की गाड़ी चलाओ,
ये राजनीति सब छोड़ो,
बस राम नीति अपनाओ,
भक्तों के लिए ये खुशियां,
सुबहो शाम लाएंगे,
कभी तों अपनी कुटियां में भी,
राम आएंगे।4।

कर त्याग भरत सा प्यारे,
शबरी सा धीरज धरले,
पढ़ राम चरित मानस को,
हनुमत सी भक्ति करले,
ये मंत्र प्रभु भक्ति के,
‘रोमी’ काम आएंगे,
कभी तों अपनी कुटियां में भी,
राम आएंगे।5।

कुछ बेर चुनो नेकी के,
अपने काम आएंगे,
कभी तो अपनी कुटिया में भी,
राम आएंगे।6।

प्रभु राम का प्रेम निरंतर बहने वाली गंगा की तरह है, जो हर भक्त के हृदय को पावन कर देती है। हमें अपने मन की कुटिया को निर्मल रखना होगा, ताकि राम वहां पधारें और उसे अपने दिव्य प्रेम से भर दें। यदि यह भजन आपके मन को भक्ति में डुबो गया हो, तो आप राम जी ने शबरी के खाए झूठे बेर, राम जी के शरण में चले आइये, मुझे मेरे राम का दीदार हो जाए, और भगवान को करने पार भगत की नाव चली जैसे अन्य भजन और लेख भी पढ़ सकते हैं। ???? जय श्रीराम! ????

Leave a comment