Dil Se Dil Bharakar Na Dekhi Murat Sitaram Ki
दिल से दिल भरकर ना देखि,
मूरत सीताराम की,
हर दिल के अंदर बसी है…
झांकी सीताराम की,
दिल से दिल भरकर ना देखि,
मूरत सीताराम की।।
भक्त हो तो ऐसे हो,
जैसे है हनुमान जी,
सीना फाड़ करके दिखाई…
मूरत सीताराम की,
दिल से दिल भरकर ना देखी,
मूरत सीताराम की।।
भक्त हो तो ऐसे हो,
जैसे है प्रह्लाद जी,
कर्म खम्बे में दिखाई…
मूरत सीताराम की,
दिल से दिल भरकर ना देखी,
मूरत सीताराम की।।
भक्तन हो तो ऐसी हो,
जैसी मीराबाई जी,
जहर को अमृत बनाया…
जय जय सीताराम की,
दिल से दिल भरकर ना देखी,
मूरत सीताराम की।।
दिल से दिल भरकर ना देखि,
मूरत सीताराम की,
हर दिल के अंदर बसी है…
झांकी सीताराम की,
दिल से दिल भरकर ना देखी,
मूरत सीताराम की।।

मैं आचार्य ब्रह्मदत्त, सनातन धर्म का एक साधक और आध्यात्मिक ज्ञान का प्रचारक हूँ। मेरा जीवन देवी-देवताओं की आराधना, वेदों-पुराणों के अध्ययन और भक्ति मार्ग के अनुसरण में समर्पित है। सूर्य देव, खाटू श्याम, शिव जी और अन्य देवी-देवताओं की महिमा का गुणगान करना मेरे लिए केवल एक लेखन कार्य नहीं, बल्कि एक दिव्य सेवा है। मैं अपने लेखों के माध्यम से भक्तों को पूजन विधि, मंत्र, स्तोत्र, आरती और धार्मिक ग्रंथों का ज्ञान सरल भाषा में प्रदान करने का प्रयास करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने आध्यात्मिक पथ को सुगम और सार्थक बना सके। View Profile