Dekha Lakhan Ka Hal Tao Shri Ram Ro Pade
देखा लखन का हाल तो, श्री राम रो पड़े,
अंगद सुग्रीव जामवंत, बलवान रो पड़े,
देखा लखन का हाल तो श्री राम रो पड़े॥॥
लंका विजय की अब मुझे चाहत नही रही,
मुझमें धनुष उठाने की ताकत नही रही,
रघुवर के साथ धरती-आसमान रो पड़े,
देखा लखन काहाल तो श्री राम रो पड़े॥॥
करने लगे विलाप श्री राम फूटकर,
क्या मे जवाब दूँगा अयोध्या मे लौटकर,
जितने थे मन मे राम के अरमान रो पड़े,
देखा लखन क हाल तो श्री राम रो पड़े॥॥
सुग्रीव जामवंत सुनो ए अंगद बलवान,
लक्ष्मण नही बचा तो त्यज दूँगा मे भी प्राण,
धरती पे पड़ा जो धनुष बाण रो पड़े,
देखा लखनका हाल तो श्री राम रो पड़े॥॥
देखा जो जामवंत ने तो हनुमान उड़ गये,
सूर्योदय से पहले ही बूटी ले मुड़ गये,
गले लगा हनुमान को भगवान रो पड़े,
देखा लखन का हाल तों श्री राम रो पड़े॥॥
देखा लखन का हाल तो, श्री राम रो पड़े,
अंगद सुग्रीव जामवंत, बलवान रो पड़े,
देखा लखन का हाल तो श्री राम रो पड़े॥॥

मैं आचार्य ब्रह्मदत्त, सनातन धर्म का एक साधक और आध्यात्मिक ज्ञान का प्रचारक हूँ। मेरा जीवन देवी-देवताओं की आराधना, वेदों-पुराणों के अध्ययन और भक्ति मार्ग के अनुसरण में समर्पित है। सूर्य देव, खाटू श्याम, शिव जी और अन्य देवी-देवताओं की महिमा का गुणगान करना मेरे लिए केवल एक लेखन कार्य नहीं, बल्कि एक दिव्य सेवा है। मैं अपने लेखों के माध्यम से भक्तों को पूजन विधि, मंत्र, स्तोत्र, आरती और धार्मिक ग्रंथों का ज्ञान सरल भाषा में प्रदान करने का प्रयास करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने आध्यात्मिक पथ को सुगम और सार्थक बना सके। View Profile