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प्यारो घणो लागे जी नारायण

प्यारो घणो लागे जी नारायण भजन भगवान विष्णु के प्रति भक्त की गहरी श्रद्धा और प्रेम को दर्शाता है। जब कोई भक्त सच्चे हृदय से श्रीहरि का स्मरण करता है, तो उसका मन उनके दिव्य प्रेम में लीन हो जाता है। यह भजन उसी प्रेम और भक्ति की भावना को प्रकट करता है, जिससे विष्णु जी की कृपा सहज ही प्राप्त होती है। आइए, इस भजन के मधुर शब्दों में रमकर नारायण के प्रेम का अनुभव करें।

Pyaro Gano Lage Ji Narayan

प्यारो घणो लागे जी नारायण थांको मालासेरी दरबार,

मंदिरिया के आजु बाजू सरोवर भरिया हजार,
ऊँची ऊँची लहरें चाले ,ठण्डी चाले फुवांर॥ प्यारो…..॥1॥

भांत भांत का रुक भरकड़ा पायो नही कोई पार,
कोयल मोर पपहिया बोले, बोले राग मलार॥ प्यारो…..॥2॥

भोजा जी गोड़ी पर बैठा बगड़ावत सरदार,
मंदिर माही बैठी साडू माता महिमा अपरम्पार॥ प्यारो…..॥3॥

लंबो चोडो मंदिर थांको छोड़ा है चौबार,
एक साल में दो- दो मेला आवे लाखों नरनार॥ प्यारो…..॥4॥

राती जगा और जात जड़ूला आवे रोज अपार,
चम्पा लाल मालासेरी वालो थांका गावे मंगलाचार॥5॥

भगवान विष्णु अपने भक्तों के प्रेम से बंध जाते हैं और उनकी कृपा से ही जीवन आनंदमय हो जाता है। प्यारो घणो लागे जी नारायण भजन हमें यही सिखाता है कि श्रीहरि की भक्ति से बढ़कर कुछ भी नहीं। यदि यह भजन आपके हृदय को भक्ति से भर देता है, तो गोविंद बोलो हरि गोपाल बोलो, श्री हरि विष्णु वंदना, अच्युतं केशवं, और नारायण नाम सुमिरन कर ले जैसे अन्य विष्णु भजनों को भी पढ़ें और करें, जिससे भक्ति रस में और अधिक डूब सकें। ????✨

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