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पूरब से जब सूरज निकले सिंदूरी घन छाए भजन लिरिक्स

पूरब से जब सूरज निकले सिंदूरी घन छाए यह भजन प्रभु शिव के दिव्य रूप और प्रकृति की सुंदरता को अत्यंत भव्यता से प्रस्तुत करता है। यह भजन हमें बताता है कि जब सूरज निकलता है और आकाश में सिंदूरी रंग छाने लगता है, तब वही प्राकृतिक छटा शिव जी के अद्वितीय रूप और उनके प्रभाव का प्रतीक मानी जाती है। इस भजन के माध्यम से भक्त शिव की महिमा का गान करते हुए उनके दर्शन की चाह में समर्पित होते हैं।

Purab Se Jab Suraj Nikale Sunduri Ghan Chhaye

पूरब से जब सूरज निकले,
सिंदूरी घन छाए,
पवन के पग में नुपुर बाजे,
मयूर मन मेरा गाये,
मन मेरा गाये,
ॐ नमः शिवाय,
ॐ नमः शिवाय,
ॐ नमः शिवाय,
ॐ नमः शिवाय।।

पुष्प की माला थाल सजाऊं,
गंगाजल भर कलश मैं लाऊं,
नव ज्योति के दीप जलाऊं,
चरणों में नित शीश झुकाऊं,
भाव विभोर होके भक्ति में,
रोम रोम रम जाये,
मन मेरा गाये,
ॐ नमः शिवाय,
ॐ नमः शिवाय,
ॐ नमः शिवाय,
ॐ नमः शिवाय।।

अभयंकर शंकर अविनाशी,
मैं तेरे दर्शन की अभिलाषी,
जन्मों की पूजा की प्यासी,
मुझपे करना कृपा जरा सी,
तेरे सिवा मेरे प्राणों को,
और कोई ना भाये,
मन मेरा गाये,
ॐ नमः शिवाय,
ॐ नमः शिवाय,
ॐ नमः शिवाय,
ॐ नमः शिवाय।।

पूरब से जब सूरज निकले,
सिंदूरी घन छाए,
पवन के पग में नुपुर बाजे,
मयूर मन मेरा गाये,
मन मेरा गाये,
ॐ नमः शिवाय,
ॐ नमः शिवाय,
ॐ नमः शिवाय,
ॐ नमः शिवाय।।

पूरब से जब सूरज निकले सिंदूरी घन छाए भजन में शिव जी के महान प्रभाव और दिव्य उपस्थिति का वर्णन किया गया है। यह भजन हमें यह अहसास कराता है कि जैसे सूरज की किरणें प्रकृति को रोशन करती हैं, वैसे ही शिव जी का आशीर्वाद और कृपा हमारे जीवन को प्रकाशित करती हैं। इस भजन की तरह शिव ने श्रृंगार किया है और भोलेनाथ की महिमा जैसे अन्य भजन भी शिव जी की महिमा और उनकी दिव्यता का उत्सव मनाते हैं। शिव की भक्ति में रम जाने से जीवन में हर कठिनाई का निवारण होता है, और उनका आशीर्वाद हमें सच्चे मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।









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