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ओ शंकर मेरे कब होंगे दर्शन तेरे भजन लिरिक्स

भगवान शंकर की भक्ति में डूबे हर भक्त का एक ही अरमान होता है – उनके दिव्य दर्शन प्राप्त करना। ओ शंकर मेरे कब होंगे दर्शन तेरे भजन इसी भक्तिपूर्ण भावना को व्यक्त करता है। इस भजन में एक भक्त की व्याकुलता, श्रद्धा और प्रेम की झलक मिलती है, जो महादेव के दर्शनों की अभिलाषा में तड़प रहा है। यह भजन शिव जी की आराधना में हमें और अधिक समर्पित करता है। आइए, इस भक्तिमय भजन का स्मरण करें।

O Shankar Mere Kab Honge Darshan Tere

ओ शंकर मेरे
कब होंगे दर्शन तेरे,
जीवन पथ पर शाम सवेरे
जीवन पथ पर शाम सवेरे,
छाए है घनघोर अँधेरे
ओ शंकर मेरें,
कब होंगे दर्शन तेरे।।

मैं मूरख तू अंतर्यामी,
मैं मूरख तू अंतर्यामी
मैं सेवक तू मेरा स्वामी,
मैं सेवक तू मेरा स्वामी
काहे मुझसे नाता तोड़ा,
मन छोड़ा मंदिर भी छोड़ा
कितनी दूर लगाये तूने,
जा कैलाश पे डेरे
ओ शंकर मेरें,
कब होंगे दर्शन तेरे।।

तेरे द्वार पे ज्योत जगाते,
तेरे द्वार पे ज्योत जगाते
युग बीते तेरे गुण गाते,
युग बीते तेरे गुण गाते
ना मांगू मैं हीरे मोती,
मांगू बस थोड़ी सी ज्योति
खाली हाथ न जाऊँगा मैं,
दाता द्वार से तेरे
ओ शंकर मेरें,
कब होंगे दर्शन तेरे।।

ओ शंकर मेरे,
कब होंगे दर्शन तेरे
जीवन पथ पर शाम सवेरे,
जीवन पथ पर शाम सवेरे
छाए है घनघोर अँधेरे,
ओ शंकर मेरें,
कब होंगे दर्शन तेरे।।

भोलेनाथ के दर्शन की अभिलाषा हर भक्त के हृदय में होती है, और इस भजन के माध्यम से वह भावना और अधिक प्रबल हो जाती है। शिवजी की कृपा पाने के लिए उनकी भक्ति में लीन रहना आवश्यक है। उनकी महिमा को और अधिक गहराई से अनुभव करने के लिए शिव ने श्रृंगार किया है गौरा क्या बाकी, हर हर शंभू शिव महादेवा, भोलेनाथ तुम्हारा भोलापन, और चलती है सारी सृष्टि महाकाल के दर से भजनों को भी अवश्य पढ़ें और शिव आराधना में मग्न हो जाएं। ????????

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