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ओ मैया सज धज के बैठी करके सोलह श्रृंगार

ओ मैया सज धज के बैठी करके सोलह श्रृंगार भजन में माँ दुर्गा के दिव्य और अलौकिक रूप का वर्णन किया गया है। जब माँ जगदंबा अपने भक्तों के कल्याण के लिए प्रकट होती हैं, तो उनका श्रृंगार और तेजस्वी स्वरूप देखते ही बनता है। यह भजन माँ की अद्भुत छवि को हमारे हृदय में स्थापित करता है और उनकी आराधना के प्रति हमारी श्रद्धा को और गहरा कर देता है। माँ का सोलह श्रृंगार न केवल उनकी दिव्यता को दर्शाता है, बल्कि भक्तों के मन में आनंद और भक्ति का संचार भी करता है।

O Maiya Saj Dhaj Ke Baithi Karke Solah Shringar

ओ मैया सज धज के बैठी,
करके सोलह श्रृंगार,
आई घर जो मेरे,
लाई खुशियां अपार।1।

तू ही माँ लक्ष्मी तू ही भद्रकाली,
तू ही अविनाशी तू ही शेरोवाली,
हो मैया संकट के आड़े,
रहती हरदम तैयार,
आई घर जो मेरे,
लाई खुशियां अपार।2।

ऊंचे भवन से उतर आई देखो,
आओ सभी तुम भी मैया से कहदो,
हो मैया यूं ही हमेशा,
करना हमको दुलार,
आई घर जो मेरे,
लाई खुशियां अपार।3।

अर्जी है मेरी यही माता रानी,
चरणों में रखना मुझे महारानी,
हो मैया ‘नेहा’ ये चाहे,
करना तेरा दीदार,
आई घर जो मेरे,
लाई खुशियां अपार।4।

ओ मैया सज धज के बैठी,
करके सोलह श्रृंगार,
आई घर जो मेरे,
लाई खुशियां अपार।5।

ओ मैया सज धज के बैठी करके सोलह श्रृंगार भजन माँ की अनुपम शोभा और भक्तों की अपार श्रद्धा को व्यक्त करता है। जब भक्त माँ के सजे-धजे रूप का ध्यान करते हैं, तो उनका मन प्रसन्न हो जाता है और आत्मा को असीम शांति मिलती है। इसी तरह, “मेरी मैया तेरे चरणों में मुझको है रहना” भजन भी माँ के चरणों की महिमा को दर्शाता है। माँ की कृपा सदा बनी रहे, उनके भजनों का निरंतर गुणगान करें और उनकी भक्ति में लीन रहें। जय माता दी! ????????

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