नगरी हो उज्जैन जैसी, क्षिप्रा का किनारा हो भजन शिव भक्तों की उस दिव्य कल्पना को दर्शाता है, जहां उज्जैन जैसा पवित्र नगर और क्षिप्रा नदी का निर्मल जल हमें महाकाल की भक्ति में डुबो देता है। उज्जैन, जो स्वयं महाकालेश्वर की नगरी है, शिव आराधना का केंद्र माना जाता है। यह भजन हमें उस दिव्यता और भक्ति भावना से जोड़ता है, जहां महादेव का आशीर्वाद हर दिशा में बहता हुआ प्रतीत होता है।
Nagari Ho Ujjain Jaisi Kshipra Ka Kinara Ho
नगरी हो उज्जैन जैसी,
क्षिप्रा का किनारा हो,
और चरण हो महाकाल के,
जहां मेरा ठिकाना हो।1।
ना दौलत हमें चाहिए,
ना स्वर्ग हमें जाना,
बस महाकाल चरणों में,
जीवन को बिताना है।2।
ना फूल ही लाए है,
ना ही मंत्र कोई आता,
बस महाकाल चरणों में,
हम प्रार्थना लाए है।3।
महाकाल हमारे है,
महादेव हमारे है,
सुख दो दुख दो चाहे,
हम तेरे सहारे है।4।
नगरी हो उज्जैन जैसी,
क्षिप्रा का किनारा हो,
और चरण हो महाकाल के,
जहां मेरा ठिकाना हो।5।
नगरी हो उज्जैन जैसी, क्षिप्रा का किनारा हो भजन करने से हमें महाकाल की दिव्य कृपा प्राप्त होती है और आत्मा शिव प्रेम में लीन हो जाती है। जो भी उज्जैन की पावन भूमि पर महादेव का स्मरण करता है, उसे शिवशंकर का आशीर्वाद अवश्य प्राप्त होता है। अगर आपको यह भजन पसंद आया, तो महाकाल आरती, शिव तांडव स्तोत्र, शिव चालीसा, और हर हर महादेव भजन भी करें। इन भजनों से आपकी आत्मा शिव प्रेम में रम जाएगी और महाकाल का आशीर्वाद आपके जीवन में सुख-समृद्धि लेकर आएगा। ????✨