भक्ति का सच्चा स्वरूप विनम्रता में निहित होता है। जब भक्त अपने भीतर किसी भी शक्ति या भक्ति की कमी अनुभव करता है, तब भी उसकी सच्ची पुकार प्रभु तक अवश्य पहुँचती है। “ना है शक्ति, ना है भक्ति, प्रभु बालक तेरा दीवाना है” भजन इसी भावना को प्रकट करता है कि भक्त के पास कुछ भी न होते हुए भी, अगर वह प्रेम और समर्पण से प्रभु को पुकारे, तो उसकी पुकार अवश्य सुनी जाती है। आइए, इस भजन के माध्यम से अपनी प्रार्थना गुरुचरणों में अर्पित करें।
Na Hai Shakti Na Hai Bhakti Prabhu Balak Tera Diwana Hai
ना है शक्ति ना है भक्ति,
प्रभु बालक तेरा दीवाना है,
छोड़ के दर अब जाऊं कहां,
तेरे चरणों में किया ठिकाना है,
ना हैं शक्ति ना हैं भक्ति।।
जैसा भी हूं तेरा आखिर,
एक सहारा तू ही मेरा है,
अब तो तुम्हें ही निभाना है,
ना हैं शक्ति ना हैं भक्ति।।
दास तेरे दर का ही भिखारी,
डालो अपनी रहमत प्यारी,
तेरे चरणों में जीवन बिताना है,
ना हैं शक्ति ना हैं भक्ति।।
विनय यही है करुणा सागर,
हरदम रहूं चरणों का चाकर,
इस दिल की आस पूजाना है,
ना हैं शक्ति ना हैं भक्ति।।
ना जानू सेवा की रीति,
बिना रहे चरणों में प्रीति,
गुरु चरणों में शीश झुकाना है,
ना हैं शक्ति ना हैं भक्ति।।
ना है शक्ति ना है भक्ति,
प्रभु बालक तेरा दीवाना है,
छोड़ के दर अब जाऊं कहां,
तेरे चरणों में किया ठिकाना है,
ना हैं शक्ति ना हैं भक्ति।।
प्रभु की कृपा बिना किसी शर्त के मिलती है, केवल सच्ची श्रद्धा और प्रेम की आवश्यकता होती है। “ना है शक्ति, ना है भक्ति, प्रभु बालक तेरा दीवाना है” भजन हमें यह सिखाता है कि गुरु और ईश्वर के प्रति निष्कपट समर्पण ही सच्ची भक्ति है। ऐसे ही अन्य भक्तिपूर्ण भजनों जैसे “गुरु चरणों की महिमा अपार”, “गुरु बिना जीवन अधूरा”, “गुरु वाणी का प्रकाश”, और “गुरु कृपा से जीवन सफल” को पढ़ें और अपनी भक्ति को और अधिक प्रगाढ़ करें। ????