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म्हाने रंग दो नाथ थारे रंग में

म्हाने रंग दो नाथ थारे रंग में —यह भजन भक्त की उस अनोखी प्रार्थना को व्यक्त करता है, जहां वह अपने आराध्य श्याम बाबा के रंग में पूरी तरह रंग जाने की इच्छा रखता है। जब भक्त अपना अहंकार छोड़कर संपूर्ण रूप से प्रभु को समर्पित कर देता है, तब वही सच्ची भक्ति का स्वरूप बन जाता है। यह भजन हमें श्याम प्रेम में रंग जाने और उनकी भक्ति में विलीन होने की प्रेरणा देता है।

Mhane Rang Do Nath Thare Rang Me

म्हाने रंग दो नाथ थारे रंग में,
म्हारा ठाकुर लक्ष्मी रा नाथ,
म्हारे सिर पर राखो हाथ,
मेरे नाथ बसों म्हारे मन में,
म्हानें रंग दो नाथ थारें रंग में।।

तेरा श्याम रंग लागे प्यारा,
मेरी आँखों ने इसको निहारा,
अब तो बस जाओ मेरे नयन में,
म्हारा ठाकुर लक्ष्मी रा नाथ,
म्हारे सिर पर राखो हाथ,
मेरे नाथ बसों म्हारे मन में,
म्हानें रंग दो नाथ थारें रंग में।।

भोर भोर मैं द्वारे आवां,
चरणामृत तुलसी पावां,
हो ऐसी लगन लगाओ जीवन में,
म्हारा ठाकुर लक्ष्मी रा नाथ,
म्हारे सिर पर राखो हाथ,
मेरे नाथ बसों म्हारे मन में,
म्हानें रंग दो नाथ थारें रंग में।।

थारे रूप में मैं खो जावां,
जब चाहवां मैं दर्शन पावां,
हो ऐसी ज्योत जलाओ ह्रदय में,
म्हारा ठाकुर लक्ष्मी रा नाथ,
म्हारे सिर पर राखो हाथ,
मेरे नाथ बसों म्हारे मन में,
म्हानें रंग दो नाथ थारें रंग में।।

प्रीतराज मैं जाऊ बलिहारी,
आया नाथ शरण में तिहारी,
हो अब तो रखलो थोरी शरण में,
म्हारा ठाकुर लक्ष्मी रा नाथ,
म्हारे सिर पर राखो हाथ,
मेरे नाथ बसों म्हारे मन में,
म्हानें रंग दो नाथ थारें रंग में।।

म्हाने रंग दो नाथ थारे रंग में,
म्हारा ठाकुर लक्ष्मी रा नाथ,
म्हारे सिर पर राखो हाथ,
मेरे नाथ बसों म्हारे मन में,
म्हानें रंग दो नाथ थारें रंग में।।

श्याम बाबा अपने भक्तों को अपने प्रेम के रंग में रंगकर उन्हें आनंद और भक्ति के सागर में डुबा देते हैं। यह भजन हमें श्याम प्रेम की सच्ची अनुभूति कराता है और भक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। यदि यह भजन आपको अच्छा लगा, तो तेरे संग फाग मनाएंगे, श्याम पिया जी खेलो रंग के होली आई, और खाटू में रंगों की बौछार है जैसे भजनों को भी अवश्य पढ़ें और श्याम रंग में रंग जाएं। जय श्री श्याम! ????????

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