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मेरो मन लाग्यो श्री वृन्दावन धाम

मेरो मन लाग्यो श्री वृंदावन धाम—यह भजन भक्त के हृदय में उठती उस प्रबल भावना को दर्शाता है, जब वह स्वयं को श्रीकृष्ण की भक्ति में डूबा पाता है। वृंदावन केवल एक स्थान नहीं, बल्कि एक दिव्य अनुभूति, प्रेम और भक्ति का केंद्र है। यहाँ की हर गली, हर कुंज, हर वृक्ष में राधा-कृष्ण की लीला बसती है। यह भजन सुनकर ऐसा प्रतीत होता है मानो मन स्वयं वृंदावन के कुंज गलियों में विचरण करने लगा हो।

Mero Man Lagyo Shri Vrindavan Dham

मेरो मन लाग्यो,
श्री वृन्दावन धाम,
राधा राधा रटते रटते,
तन से निकले प्राण
मेरो मन लाग्यों,
श्री वृन्दावन धाम।1।

यमुना जी का निर्मल पानी,
शीतल करत शरीर,
शीतल करत शरीर,
वंशी बजावत गावत कान्हो,
संग लियो बलवीर,
संग लियो बलवीर,
मोर मुकुट पिताम्बर सोहे,
गल वैजन्ती माल,
मेरो मन लाग्यों,
श्री वृन्दावन धाम।2।

वृन्दावन के वृक्ष को प्यारे,
वृक्ष ना माने कोय,
वृक्ष ना माने कोय,
डाल डाल और पात पात श्री,
राधे राधे होय,
राधे राधे होय,
बृज को माटी माथे लगाकर,
मिल गए मुझको श्याम,
मेरो मन लाग्यों,
श्री वृन्दावन धाम।3।

राधा रमण मेरे श्री बांके बिहारी,
राधा वल्लभ लाल,
राधा वल्लभ लाल,
युगल किशोर जू मदन मोहन जू,
प्यारे गोपीनाथ,
प्यारे गोपीनाथ,
रूप गोस्वामी प्रकट कियो जहाँ,
गोविन्द रूप निधान,
वृन्दावन के सप्त निधिन को,
करते है हम प्रणाम,
मेरो मन लाग्यों,
श्री वृन्दावन धाम।4।

मेरो मन लाग्यो,
श्री वृन्दावन धाम,
राधा राधा रटते रटते,
तन से निकले प्राण
मेरो मन लाग्यों,
श्री वृन्दावन धाम।5।

वृंदावन धाम का महात्म्य अनंत है। यह वही स्थान है जहाँ कृष्ण ने अपनी लीलाओं से भक्तों को प्रेम और भक्ति का वास्तविक स्वरूप दिखाया। अगर आपका मन भी वृंदावन की भक्ति में रम गया, तो वो मुरली याद आती है, श्रृंगार तेरा देखा तो तुझ में खो गया हूँ, और खोली है सांवरे ने खिड़की नसीब की जैसे अन्य भजनों को भी अवश्य करें और अपने मन को श्रीकृष्ण प्रेम से सराबोर करें। जय श्री कृष्ण! ????????????

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