जब भक्ति हृदय से निकलती है, तो वह प्रेम और शिकायत दोनों का रूप ले सकती है। मेरी तुमसे लड़ाई है भजन भी इसी गहरे भाव को प्रकट करता है। माँ दुर्गा से कभी प्रेम भरी बातें होती हैं, तो कभी मासूम-सी शिकायते भी। यह भजन भक्त और माँ के बीच के उस अनूठे रिश्ते को दर्शाता है। जब हम इसे सुनते हैं, तो लगता है जैसे हम माँ दुर्गा से सीधे संवाद कर रहे हों, अपनी मन की भावनाएँ उनसे कह रहे हों।
Meri Tumse Ladai Hai Lyrics
दोहा –
दर दर भटक लिया,
तेरे दीदार के लिए,
और चुन चुन कर फूल लाया हूँ,
तेरे हार के लिए,
अब तारो या ना तारो ये,
मर्जी तुम्हारी है,
जमाने की खाई ठोकरे,
तेरे दरबार के लिए,
फरियादी है खामोश मगर,
ज़िद पे अड़ा है,
दीवाना बड़ी देर से,
तेरे दर पे खड़ा है।
आवाज़ देगी मैया,
मैं इंतेज़ार में बैठा हूँ,
रख दो हाथ दया का सर पे,
मैं भी तो तेरा बेटा हूँ।1।
मेरी बिगड़ी बनाने में,
क्यों देर लगाई है,
मेरी तुमसे लड़ाई है,
हाँ मेरी तुम से लडाई है।2।
आज बचालो मैया,
तुमको पुकारा है,
सारे जहाँ में नही,
कोई हमारा है,
फरियाद सुनाई है,
हाँ फरियाद सुनाई है,
मेरी तुम से लडाई है,
हाँ मेरी तुम से लडाई है।3।
मुश्किल ये अपनी मैया,
किसको सुनाऊं मैं,
छोड़कर तुम्हारा मंदिर,
और कहां जाऊं मैं,
तेरी जग में बड़ाई है,
हाँ तेरी जग में बड़ाई है,
मेरी तुम से लडाई है,
हाँ मेरी तुम से लडाई है।4।
भीख दया की मैया,
तुमसे ही पाऊंगा,
आज तुम्हारे दर से,
खाली ना जाऊंगा,
मैंने अर्जी लगाई है,
हाँ मैंने अर्जी लगाई है,
मेरी तुम से लडाई है,
हाँ मेरी तुम से लडाई है।5।
प्रेमी दीवाना तेरा,
क्यों तड़पाती हो,
ममतामई इस जग में,
तुम कहलाती हो,
लाखों की बनाई है,
तूने लाखों की बनाई है,
मेरी तुम से लडाई है,
हाँ मेरी तुम से लडाई है।6।
“मेरी तुमसे लड़ाई है” भजन में माँ दुर्गा के प्रति प्रेम और अनोखी शिकायतों का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। यह हमें सिखाता है कि माँ के साथ हमारा रिश्ता कितना आत्मीय और गहरा है। इसी तरह, जब भक्ति का स्वर प्रेम से भर जाता है, तो “[दुर्गा माँ की महिमा]” जैसे भजन हमारे हृदय को और अधिक भक्ति से ओतप्रोत कर देते हैं। माँ की कृपा बनी रहे, उनकी भक्ति यूँ ही हमारे जीवन में प्रवाहित होती रहे। ????????