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मेरी लगी गुरु संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने भजन लिरिक्स

“मेरी लगी गुरु संग प्रीत, ये दुनिया क्या जाने” भजन उस अलौकिक प्रेम और समर्पण को प्रकट करता है, जो एक भक्त और उसके गुरुदेव के बीच होता है। संसार भले ही इस दिव्य प्रेम को न समझे, लेकिन जो गुरुदेव की शरण में आ जाता है, वह सच्चे आनंद और शांति का अनुभव करता है। यह भजन हमें भक्ति के उस मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है, जहाँ केवल श्रद्धा और विश्वास का प्रकाश होता है।

Meri Lagi Guru Sang Prit Ye Duniya Kya Jane Bhajan Lyrics

मेरी लगी गुरु संग प्रीत,
ये दुनिया क्या जाने,
क्या जाने भई क्या जाने,
क्या जाने भई क्या जाने,
मुझे मिल गया मन का मीत,
ये दुनिया क्या जाने,
मेरी लगी गुरु संग प्रित,
ये दुनिया क्या जाने।।

बाजी जब गुरुवर पे लगाई,
पलट गया पासा मेरे भाई,
मेरी हार हो गई जीत,
ये दुनिया क्या जाने,
मुझे मिल गया मन का मीत,
ये दुनिया क्या जाने,
मेरी लगी गुरु संग प्रित,
ये दुनिया क्या जाने।।

प्रीतम ने खुद प्रेम जताया,
करके इशारा पास बुलाया,
है प्रेम की उलटी रीत,
ये दुनिया क्या जाने,
मुझे मिल गया मन का मीत,
ये दुनिया क्या जाने,
मेरी लगी गुरु संग प्रित,
ये दुनिया क्या जाने।।

ताल अलग है राग अलग है,
ये वैराग अनुराग अलग है,
मन गाए किसके गीत,
ये दुनिया क्या जाने,
मुझे मिल गया मन का मीत,
ये दुनिया क्या जाने,
मेरी लगी गुरु संग प्रित,
ये दुनिया क्या जाने।।

सत्संगी होकर जो सीखा,
काम क्रोध खोकर जो सीखा,
कैसा है ये संगीत,
ये दुनिया क्या जाने,
मुझे मिल गया मन का मीत,
ये दुनिया क्या जाने,
मेरी लगी गुरु संग प्रित,
ये दुनिया क्या जाने।।

मेरी लगी गुरु संग प्रीत,
ये दुनिया क्या जाने,
क्या जाने भई क्या जाने,
क्या जाने भई क्या जाने,
मुझे मिल गया मन का मीत,
ये दुनिया क्या जाने,
मेरी लगी गुरु संग प्रित,
ये दुनिया क्या जाने।।

गुरुदेव के प्रति प्रेम और समर्पण ही सच्ची भक्ति का स्वरूप है, जिसे “मेरी लगी गुरु संग प्रीत, ये दुनिया क्या जाने” भजन बड़ी सुंदरता से प्रकट करता है। जब हम इस प्रेम में डूब जाते हैं, तब बाहरी संसार की परवाह नहीं रहती, केवल गुरुदेव की कृपा ही जीवन का आधार बन जाती है। यदि आप और अधिक भक्ति-भाव से भरे गुरु भजन पढ़ना चाहते हैं, तो “जनम जनम का साथ हैं गुरुदेव तुम्हारा”, “गुरुवर तुमसे इतना कहना चरणों में तुम्हरे रहना”, “बस एक सहारा तुम गुरुदेव दया करना” और “गुरुदेव के चरणों में सौ बार नमन मेरा” को अवश्य पढ़ें और गुरुदेव की कृपा का अनुभव करें।









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