मेरी भी सुध लीजिये वीर बलि हनुमान भजन भक्तों की विनम्र प्रार्थना को व्यक्त करता है, जिसमें वे संकटमोचक हनुमान जी से अपनी कृपा बनाए रखने की गुहार लगाते हैं। यह भजन उस अटूट श्रद्धा को दर्शाता है, जो भक्त अपने आराध्य बजरंगबली के प्रति रखते हैं। जब जीवन में कठिनाइयाँ और बाधाएँ आती हैं, तब भक्त हनुमान जी को पुकारते हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि उनकी कृपा से हर संकट दूर हो सकता है। यह भजन हमें यह सिखाता है कि अगर हम सच्चे मन से हनुमान जी का स्मरण करें, तो वे अवश्य हमारी सुध लेंगे और हमें हर विपत्ति से उबारेंगे।
Meri bhi Sud Lijiye Veer Bali Hanuman
मेरी भी सुध लीजिये,
वीर बलि हनुमान।
इस सेवक को दे दीजिये,
इस सेवक को दे देना।
इस सेवक को दे देना,
चरणों में तू अस्थान।
मेरी भी सुध लीजिए,
वीर बलि हनुमान।।
जबसे होश संभाला मैंने,
तुमको अपना माना है।
बालक ये नादान तुम्हारे,
चरणों का दीवाना है।
अब तेरी दया का दे दो,
अब तेरी दया का दे दो।
मुझको भी थोड़ा दान,
मेरी भी सुध लीजिए।
वीर बलि हनुमान।।
छोटे से इस दास की अर्जी,
यूँ ही ना ठुकरा देना।
शरणागत को आके बाबा,
अपने गले लगा लेना।
मेरी अर्जी पर भी देना,
मेरी अर्जी पर भी देना।
बाबा थोड़ा सा ध्यान,
मेरी भी सुध लीजिए,
वीर बलि हनुमान।।
तेरी भक्ति की संजीवन,
मुझको जरा पीला दे तू।
माया के जंजाल से मुझको,
मुक्ति जरा दिला दे दू।
ये ‘हर्ष’ सदा ही गाए,
ये ‘हर्ष’ सदा ही गाए।
बाबा तेरा गुणगान,
मेरी भी सुध लीजिए।
वीर बलि हनुमान।।
मेरी भी सुध लीजिये,
वीर बलि हनुमान।
इस सेवक को दे दीजिये,
इस सेवक को दे देना।
इस सेवक को दे देना,
चरणों में तू अस्थान।
मेरी भी सुध लीजिए,
वीर बलि हनुमान।।
हनुमान जी केवल बल और बुद्धि के प्रतीक नहीं, बल्कि करुणा और दया के सागर भी हैं। जब भी कोई भक्त सच्चे मन से उनकी शरण में आता है, वे उसकी रक्षा करते हैं और उसे जीवन के हर संकट से मुक्त कर देते हैं। यह भजन हमें यह संदेश देता है कि हमें भी अपनी आस्था को मजबूत रखना चाहिए और हर परिस्थिति में बजरंगबली का आश्रय लेना चाहिए। उनकी भक्ति करने से न केवल हमारे कष्ट दूर होंगे, बल्कि हमारे जीवन में शांति और समृद्धि का भी वास होगा।