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मेरे मन में भी राम मेरे तन में भी राम

जब भक्ति सच्ची होती है, तो मन और तन दोनों ही प्रभु श्रीराम के रंग में रंग जाते हैं। मेरे मन में भी राम, मेरे तन में भी राम भजन इस पवित्र एहसास को प्रकट करता है कि जब एक भक्त अपने आराध्य को पूरे मन से स्वीकार कर लेता है, तो फिर वह हर सांस में राम को ही बसाता है। यह भजन हमें यह संदेश देता है कि श्रीराम केवल मंदिरों में नहीं, बल्कि हमारे हृदय में भी विराजमान हैं—बस उन्हें सच्चे प्रेम और श्रद्धा से पुकारने की आवश्यकता है।

Mere Man Me Bhi Ram Mere Tan Me Bhi Ram

मेरे मन में भी राम,
मेरे तन में भी राम,
रोम रोम में समाया मेरा राम रे,
मेरी सांसो में राम ही राम रे।1।

जैसे मुझमे है राम,
जैसे तुझमे है राम,
हम सबमे समाया मेरा राम रे,
मेरी सांसो में राम ही राम रे।2।

जैसे गंगा में राम,
जैसे यमुना में राम,
सब नदियों में समाया मेरा राम रे,
मेरी सांसो में राम ही राम रे।3।

जैसे चंदा में है राम,
जैसे सूरज में है राम,
तारों मंडल में समाया मेरा राम रे,
मेरी सांसो में राम ही राम रे।4।

जैसे भीलनी के राम,
जैसे मीरा के श्याम,
नर नारी में समाया मेरा राम रे,
मेरी सांसो में राम ही राम रे।5।

जैसे सीता के राम,
जैसे राधा के श्याम,
पत्ते पत्ते में समाया मेरा राम रे,
मेरी सांसो में राम ही राम रे।6।

मेरे मन में भी राम,
मेरे तन में भी राम,
रोम रोम में समाया मेरा राम रे,
मेरी सांसो में राम ही राम रे।7।

प्रभु श्रीराम की भक्ति वही कर सकता है, जो अपने तन, मन और आत्मा को उनके चरणों में समर्पित कर दे। यह भजन हमें यह एहसास कराता है कि जब तक हमारे हृदय में राम नहीं, तब तक सच्चा सुख नहीं। यदि यह भजन आपके मन में राम भक्ति का दीप जला गया हो, तो आप राम के थे राम के हैं हम राम के रहेंगे, राम गुण गायो नहीं आय करके यम से कहोगे क्या जाय करके, छोड़कर सारे पागलपन राम गुण गा ले मेरे मन, और राम जी के शरण में चले आइये जैसे अन्य भजन और लेख भी पढ़ सकते हैं। ???? जय श्रीराम! ????

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