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मेरे मन के मंदिर में मूरत है श्याम की

भक्ति का सबसे पवित्र स्थान हृदय का मंदिर होता है, जहाँ प्रेम और श्रद्धा से भगवान का वास होता है। जब मन श्रीकृष्ण की भक्ति में डूब जाता है, तो वह स्वयं उनके चरणों में समर्पित हो जाता है। भजन मेरे मन के मंदिर में मूरत है श्याम की इसी गहरे भाव को प्रकट करता है, जहाँ भक्त अपने हृदय में बसे श्रीकृष्ण की अनुभूति करता है। आइए, इस भजन के मधुर शब्दों से कृष्ण भक्ति का आनंद लें।

Mere Man Ke Mandir Me Murat Hai Shyam Ki

मेरे मन के मंदिर में,
मूरत है श्याम की,
आंखों में बस गई,
सूरत है श्याम की,
जमाने की मुझको,
परवाह नहीं है,
दीवानी हूँ मैं,
खाटू वाले के नाम की।1।

दुनिया के दर्दों गम की,
मारी हुई हूँ,
हारे का सहारा तो मैं,
हारी हुई हूँ,
पुजारन हुई तन मन से,
उनके मैं नाम की,
आंखों में बस गई,
सूरत है श्याम की।2।

स्वर्ग है उन्हीं के,
चरणों में मेरा,
वो दीपक है मेरे मन का,
मैं हूं अंधेरा,
उन्हीं से सवेरा वही,
शक्ति है शाम की,
आंखों में बस गई,
सूरत है श्याम की।3।

श्याम के मैं पास हूं,
श्याम के करीब हूं,
बताओ तो फिर मैं,
कैसी गरीब हूं,
बदल देती किस्मत ‘मुन्ना’,
खाक उनके धाम की,
आंखों में बस गई,
सूरत है श्याम की।4।

मेरे मन के मंदिर में,
मूरत है श्याम की,
आंखों में बस गई,
सूरत है श्याम की,
जमाने की मुझको,
परवाह नहीं है,
दीवानी हूँ मैं,
खाटू वाले के नाम की।5।

जब श्रीकृष्ण भक्त के मन-मंदिर में बस जाते हैं, तो हर क्षण भक्ति से आलोकित हो जाता है। उनकी प्रेममयी छवि मन को शांति और आनंद प्रदान करती है। ऐसे ही भक्तिमय भजनों को पढ़ें और करें, जैसे दीनो के नाथ दीनानाथ हमारी सुध लो प्रभु जी, सुना है तेरे दर पे आके मोहन, राधे राधे जपो चले आएंगे बिहारी और श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम, जिससे कृष्ण प्रेम और भक्ति का भाव और प्रगाढ़ हो सके। ????????

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