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मंदिर में सजके ये बैठा साँवरा

मंदिर में सजके ये बैठा साँवरा —यह भजन श्याम प्रभु के अलौकिक रूप और उनके दिव्य दरबार की महिमा का वर्णन करता है। जब भक्त खाटू नगरी पहुंचते हैं और मंदिर में सजे हुए सांवरे सरकार के दर्शन करते हैं, तो मन आनंद से भर जाता है। बाबा के मुकुट, उनके श्रृंगार और उनकी मोहक मुस्कान को निहारकर हर भक्त भाव-विभोर हो जाता है। यह भजन हमें श्याम धणी के भव्य स्वरूप का स्मरण कराता है और उनकी भक्ति में डूब जाने को प्रेरित करता है।

Mandir Me Sajke Ye Baitha Sanwara

मंदिर में सजके ये बैठा साँवरा,
जिसे देखके मन मेरा बोले ये बावरा,
है श्याम सलोना सुंदर मेरा साँवरा,
जिसे देखके मन मेरा बोले ये बावरा।।

शीश मुकुट तेरे कानो में कुण्डल,
गल मोतियन की माल,
तन केशरिया बागा है जिसमे,
हीरे जड़े है लाल,
मुख पे बरसता जिनके नुर,
दिव्य तेज ललाट पे है भरपुर,
लीले घोड़े चढ़कर बैठा साँवरा,
जिसे देखके मन मेरा बोले ये बावरा।।

“दिलबर” ओ दिलदार मेरे,
तू है यारो का यार,
तू हारे का सहारा है तू ही पालनहार,
इन होंटो पर तेरा नाम है,
इस धड़कन में मेरे श्याम है,
हर प्रेमी के दिल में बैठा साँवरा,
जिसे देखके मन मेरा बोले ये बावरा।।

मंदिर में सजके ये बैठा साँवरा,
जिसे देखके मन मेरा बोले ये बावरा,
है श्याम सलोना सुंदर मेरा साँवरा,
जिसे देखके मन मेरा बोले ये बावरा।।

श्याम बाबा अपने भक्तों को दर्शन देकर उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। यह भजन हमें उनके मंदिर की पवित्रता और उनके दिव्य स्वरूप का अहसास कराता है। यदि यह भजन आपको पसंद आया, तो बुलावे म्हारो सांवरो, सांवरिया म्हाने थारो दीदार चाहिए, और मेरे घर के ऊपर तेरी मोरछड़ी का साया हो जैसे भजनों को भी अवश्य पढ़ें और श्याम प्रेम में खो जाएं। जय श्री श्याम! ????????

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