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मन मोहन मूरत तेरी प्रभु

कन्हैया की मनमोहक मूरत हर भक्त के हृदय को शांति और प्रेम से भर देती है। मन मोहन मूरत तेरी प्रभु भजन श्री कृष्ण की उस अद्भुत छवि को दर्शाता है, जो भक्तों के मन को मोह लेती है। उनकी मोहिनी मुस्कान, बंसी की मधुर तान और उनकी दिव्य लीलाएँ हर भक्त को अपने प्रेम में बांध लेती हैं। आइए, इस भजन को पढ़ें और स्वयं को कृष्णमय कर लें।

Man Mohan Murat Teri Prabhu

मन मोहन मूरत तेरी प्रभु,
मिल जाओगे आप कहीं ना कहीं,
यदि चाह हमारे दिल में है,
तुम्हे ढ़ुंढ ही लेंगे कहीं ना कहीं।।1।।

काशी मथुरा वृन्दावन में,
या अवधपुरी की गलियन में,
गंगा यमुना सरयू तट पर,
मिल जाओगे आप कहीं ना कहीं,
मनमोहन मुरत तेरी प्रभु,
मिल जाओगे आप कहीं ना कहीं।।2।।

घर बार को छोड़ संयासी हुए,
सबको परित्‍याग उदासी हुए,
छानेंगे बन बन खा‍क तेरी,
मिल जाओगे आप कहीं ना कहीं,
मनमोहन मुरत तेरी प्रभु,
मिल जाओगे आप कहीं ना कहीं।।3।।

सब भक्‍त तुम्‍ही को हेरेंगे,
तेरे नाम की माला फेरेंगे,
जब आप ही खूद शरमाओगे,
हमें दर्शन दोगे कहीं ना कहीं,
मनमोहन मुरत तेरी प्रभु,
मिल जाओगे आप कहीं ना कहीं।।4।।

मन मोहन मूरत तेरी प्रभु,
मिल जाओगे आप कहीं ना कहीं,
यदि चाह हमारे दिल में है,
तुम्हे ढ़ुंढ ही लेंगे कहीं ना कहीं।।5।।

श्री कृष्ण की मनमोहक मूरत का ध्यान करना ही अपने आप में एक साधना है, जो हर दुख को हर लेती है। उनकी इसी अनोखी छवि को तेरी सूरतिया जादूगारी रे सांवरा सांवरा, सांवरे हारे का सहारा तेरा नाम है, जबसे कन्हैया ने मुझे अपनाया है, कृपा बिन तेरी कुछ नहीं सांवरे जैसे भजनों में भी महसूस किया जा सकता है। आइए, इन भजनों को भी पढ़ें और अपने मन को श्री कृष्ण की भक्ति में डुबो दें। जय श्री कृष्ण! ????????

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