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मैं वृन्दावन को आई हूँ

वृन्दावन वह भूमि है जहाँ प्रेम, भक्ति और आनंद का अविरल प्रवाह बहता है। मैं वृन्दावन को आई हूँ भजन इस अलौकिक धाम की महिमा का वर्णन करता है, जहाँ कान्हा की छवि हर गली, हर कुंज में समाई हुई है। जब कोई भक्त इस पावन भूमि पर कदम रखता है, तो उसका मन बस एक ही पुकार करता है “राधे राधे!” यह भजन उसी पवित्र अनुभूति का प्रतीक है

Main Vrindavan Ko Aai Hoon

चरण रज लेने का कान्हा की,
मैं वृन्दावन को आई हूँ,
मैं वृंदावन को आई हूं,
मैं वृंदावन को आई हूं,
अरे रसिया ओ मन बसिया,
मैं वृंदावन को आई हूं।।

मैं राधे राधे गाउंगी,
श्री यमुना जी नहाउंगी,
श्री यमुना जी नहाउंगी,
अरे मोहन ओ मन मोहन,
मैं वृंदावन को आई हूं।।


छोड़ आए जमाने को,
ओ कान्हा तुमको पाने को,
ओ कान्हा तुमको पाने को,
अरे श्यामा ओ घनश्यामा,
मैं वृंदावन को आई हूं।।

चरण रज लेने का कान्हा की,
मैं वृन्दावन को आई हूँ,
मैं वृंदावन को आई हूं,
मैं वृंदावन को आई हूं,
अरे रसिया ओ मन बसिया,
मैं वृंदावन को आई हूं।।

वृन्दावन का दर्शन हर कृष्ण प्रेमी का सपना होता है, और जो एक बार यहाँ आ जाता है, वह इसके प्रेम में खो जाता है। यदि यह भजन आपके हृदय में भक्ति का संचार कर रहा है, तो “तेरी छवि निराली श्री वृन्दावन बिहारी”, “वृन्दावन में दीवाने लाखों ऐसे आते हैं”, “बाट निहारे घनश्याम नैना नीर भरे”, और “मेरा ये मन मतवाला राधे गोविंद के गुण गाए” जैसे अन्य भजनों को भी अवश्य पढ़ें। राधे राधे!

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