जब सच्ची भक्ति मन में होती है, तो दुनिया की मोह-माया फीकी पड़ जाती है, और बस माँ के चरणों में प्रेम और समर्पण का भाव रह जाता है। मैं माँ को रिझाने आया हूँ दुनिया को रिझाकर क्या करना भजन इसी निष्काम भक्ति को दर्शाता है, जहाँ भक्त का उद्देश्य केवल माँ की कृपा प्राप्त करना होता है। सांसारिक सुखों से बढ़कर माँ का आशीर्वाद ही सबसे बड़ा धन है। आइए, इस भजन के माध्यम से अपने मन को माँ की भक्ति में लीन करें।
Main Maa Ko Rijhane Aaya Hun Duniya Ko Rijhakar Kya Karna
मैं माँ को रिझाने आया हूँ,
दुनिया को रिझाकर क्या करना,
जो इसे बताने आया हूँ,
जग को वो बताकर क्या करना।1।
सत्संग मतलब सत की संगत,
और सत है माँ झुँझन वाली,
मैं उससे जुड़ने आया हूँ,
जो जग की करती रखवाली,
मैं धार बहाने आया हूँ,
गर मन हो मेरे संग बहना।2।
नैनो से नैना चार करो,
सच्चे मन से दीदार करो,
गर इसके इशारे मिल जाए,
उसको समझो स्वीकार करो,
गर लगन लगी ना दादी से,
कीर्तन में आकर क्या करना।3।
अंतर्मन की सारी बातें,
बस अंतर्यामी माँ जाने,
कोई जान सका मैं क्या हूँ,
बस दादी मेरी पहचाने,
श्री चरणों की सेवा दे दो,
इस जग में मुझको ना रहना।4।
मैं माँ को रिझाने आया हूँ,
दुनिया को रिझाकर क्या करना,
जो इसे बताने आया हूँ,
जग को वो बताकर क्या करना।5।
माँ की भक्ति से बढ़कर कोई धन नहीं, और उनकी कृपा से बढ़कर कोई वरदान नहीं। मैं माँ को रिझाने आया हूँ दुनिया को रिझाकर क्या करना भजन सच्ची श्रद्धा और आत्मसमर्पण की भावना को दर्शाता है। यदि यह भजन आपको माँ की भक्ति में तल्लीन कर देता है, तो “माँ तेरा सच्चा द्वारा लगे भक्तों को प्यारा” भजन भी अवश्य पढ़े, जिसमें माँ के दरबार की महिमा और भक्तों की अटूट आस्था का सुंदर वर्णन किया गया है।