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मैं दास गरीब हूँ सांवरिया कभी मेरे घर भी आ जाना

भक्ति का सबसे बड़ा सौंदर्य यही है कि श्रीकृष्ण अपने भक्तों के प्रेम में बंधकर स्वयं उनके द्वार आ जाते हैं। एक सच्चे भक्त को केवल उनकी कृपा की चाह होती है, और वह दीनता से प्रार्थना करता है कि उसके घर भी प्रभु चरण धरे। भजन मैं दास गरीब हूँ सांवरिया, कभी मेरे घर भी आ जाना इसी विनम्रता और प्रेम से भरी पुकार को प्रकट करता है। आइए, इस भजन के भावों में डूबकर श्रीकृष्ण को अपने हृदय में आमंत्रित करें।

Main Das Garib Hun Sawariya Kabhi Mere Ghar Bhi Aa Jana

मैं दास गरीब हूँ सांवरिया,
कभी मेरे घर भी आ जाना,
मैं आस लगाए बैठा हूँ,
कभी मुझको दरस दिखा जाना।।1।।

ना चन्दन चौकी है मेरे,
ना इत्र पुष्प ना माला है,
कुछ और नहीं है पास मेरे,
इक श्याम नाम की माला है,
कभी इत्र लगाए तन से तुम,
मेरी कुटिया को महका जाना,
मैं आस लगाए बैठा हूँ,
कभी मुझको दरस दिखा जाना।।2।।

ना माखन मिश्री है मेरे,
ना छप्पन भोग निराला है,
इस दास गरीब की कुटिया में,
इक श्याम भरा रस प्याला है,
मैं बना खिचड़ा दे दूँ तुम,
धावलिये ओट में खा जाना,
मैं आस लगाए बैठा हूँ,
कभी मुझको दरस दिखा जाना।।3।।

ना कोठी बंगला है मेरे,
ना धन दौलत ना माया है,
मेरा मन जीवन अर्पण तुमपे,
इक श्याम नाम की छाया है,
इस विप्र सुदामा के आँगन में,
तुम बनके कन्हैया आ जाना,
मैं आस लगाए बैठा हूँ,
कभी मुझको दरस दिखा जाना।।4।।

मैं दास गरीब हूँ सांवरिया,
कभी मेरे घर भी आ जाना,
मैं आस लगाए बैठा हूँ,
कभी मुझको दरस दिखा जाना।।5।।

श्रीकृष्ण अपने सच्चे भक्तों की पुकार अवश्य सुनते हैं। जब प्रेम निश्छल और समर्पण सच्चा हो, तो वे स्वयं आकर भक्त को अपने प्रेम से सराबोर कर देते हैं। ऐसे ही भक्तिमय भजनों को पढ़ें और करें, जैसे तेरी दया से चलता गुजारा बाबा हमारा , लेकर तुम चिंताएं मेरी रख लो अपने पास , एक बार भेज बुलावो खाटू आणो चाहूं मैं और हे योगेश्वर हे प्राणेश्वर हे जगदीश्वर नमो नमो , जिससे श्रीकृष्ण की भक्ति और अधिक गहरी हो जाए। ????????

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