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माँ तुम याद आई बहुत याद आईMaa Tum Yaad Aayi Bahut Yaad Aayi

जब भी मन उदास होता है या जीवन में कोई कठिनाई आती है, तो सबसे पहले हमें माँ की याद आती है। “माँ तुम याद आई बहुत याद आई” भजन भक्त के उस भाव को व्यक्त करता है जब वह माँ दुर्गा के स्नेह और संरक्षण को महसूस करता है। यह भजन हमें माँ के प्रेम की गहराई और उनके आशीर्वाद की शक्ति का एहसास कराता है, जो हर परिस्थिति में हमें संभालने के लिए हमेशा मौजूद रहती हैं।

Maa Tum Yaad Aayi Bahut Yaad Aayi

माँ तुम याद आई,
बहुत याद आई,
भटकता हुआ मैं,
तेरे दर पे आया,
तेरे नाम की माँ,
है ज्योति जगाई,
मां तुम याद आई,
बहुत याद आई।1।

आ गया दर पे,
तेरे उमंग लिए,
मन में दरशन की,
मईया तरंग लिए,
ममतामयी हो,
करुणामयी हो,
वो मूरत तेरी मेरे,
है दिल में समाई,
मां तुम याद आई,
बहुत याद आई।2।

अपने मन की व्यथा,
आज किससे कहूँ,
जग में कैसे रहूँ,
और कितना सहूँ,
जमाने ने मुझको,
कहीं का न छोड़ा,
तेरा दर है साँचा,
ये आवाज़ आई,
मां तुम याद आई,
बहुत याद आई।3।

याद में माँ तेरे,
मैं भटकता रहा,
रात दिन नाम,
तेरा ही रटता रहा,
फिर भी मिला ना,
दरश माँ तुम्हारा,
कैसे सहूँ माँ,
मैं तेरी जुदाई,
मां तुम याद आई,
बहुत याद आई।4।

तेरी किरपा की हो,
मुझपे बरसात माँ,
हो सके रोज तुमसे,
मुलाकात माँ,
‘परशुराम’ माँगे,
ये वरदान तुमसे,
सदा अपने भक्तों की,
रहो माँ सहाई,
मां तुम याद आई,
बहुत याद आई।5।

माँ तुम याद आई,
बहुत याद आई,
भटकता हुआ मैं,
तेरे दर पे आया,
तेरे नाम की माँ,
है ज्योति जगाई,
मां तुम याद आई,
बहुत याद आई।6।

“माँ तुम याद आई बहुत याद आई” भजन भक्त की उस पुकार को दर्शाता है, जो माँ के बिना अधूरा महसूस करता है। माँ दुर्गा की ममता हर दुख-दर्द को हर लेती है और उनके भजनों से मन को सुकून मिलता है। इसी तरह भक्तों के हृदय में माँ की महिमा “कुकड़ कू कुकड़ कू बोल रहो मुर्गा” जैसे भजनों में भी झलकती है। माँ की भक्ति में लीन रहिए और उनके आशीर्वाद से अपने जीवन को पवित्र बनाइए। जय माता दी! ????????

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