लप लप जीभ निकाली रण चली भवानी लिरिक्स

जब अधर्म और अत्याचार अपने चरम पर पहुँचते हैं, तब माँ भवानी अपने प्रचंड रूप में अवतरित होती हैं। लप लप जीभ निकाली रण चली भवानी भजन माँ दुर्गा के विकराल और शक्तिशाली स्वरूप का वर्णन करता है, जब वे दुष्टों का संहार करने के लिए रणभूमि में उतरती हैं। यह भजन हमें माँ काली और माँ दुर्गा की अपार शक्ति और उनके न्यायकारी रूप का स्मरण कराता है, जिससे हर भक्त उनका आशीर्वाद पाने के लिए तत्पर हो जाता है।

Lap Lap Jibh Nikali Rar Chali Bhawani Lyrics

लप लप जीभ निकाली,
रण चली भवानी।

दोहा – ध्याऊँ तो मैया ने ध्याऊँ,
और न ध्याऊँ कोय,
और सौ दुश्मन में चला जाऊँ,
तो मेरा बाल न बांका होय।
कर के अखियाँ लाल,
माँ निकली रण में,
ज्वाला धधक रही है,
माँ तेरे नैनन में।

लप लप जीभ निकाली,
रण चली भवानी,
चली रे भवानी रण,
चली रे भवानी,
मुंडुल मालाधारी,
रण चली रे भवानी,
लप लप जिभ निकाली,
रण चली रे भवानी।1।

माथे पे मुकुट कान में बाली,
माथे पे मुकुट कान में बाली,
माँ मुंडुल मालाधारी,
रण चली रे भवानी,
लप लप जिभ निकाली,
रण चली रे भवानी।2।

दानव मारन चली रे भवानी,
दानव मारन चली रे भवानी,
लेकर फरसाधारी,
रण चली रे भवानी,
लप लप जिभ निकाली,
रण चली रे भवानी।3।

मैया ने बड़ी बड़ी आँखे निकाली,
प्यारी प्यारी मैया ने आँखे निकाली,
आज भई मतवाली,
रण चली रे भवानी,
लप लप जिभ निकाली,
रण चली रे भवानी।4।

लाल तुम्हारा माँ अर्जी लगाए,
चरणों में तेरे माँ शीश झुकाए,
माँ रक्षा करो हमारी,
रण चली रे भवानी,
लप लप जिभ निकाली,
रण चली रे भवानी।5।

दानव मार दिए मैया ने,
दानव मार दिए मैया ने,
भर लिया खप्पर खाली,
रण चली रे भवानी,
लप लप जिभ निकाली,
रण चली रे भवानी।6।

लप लप जिभ निकाली,
रण चली भवानी,
चली रे भवानी रण,
चली रे भवानी,
मुंडुल मालाधारी,
रण चली रे भवानी,
लप लप जिभ निकाली,
रण चली रे भवानी।7।

माँ भवानी का प्रचंड रूप केवल दुष्टों के लिए भयकारी होता है, लेकिन अपने भक्तों के लिए वह प्रेम और रक्षा का प्रतीक हैं। “लप लप जीभ निकाली रण चली भवानी” भजन माँ के इसी अद्भुत शक्ति स्वरूप का गुणगान करता है। यदि यह भजन आपको माँ के दिव्य और महाकाल स्वरूप से जोड़ता है, तो “शेर सवारी कर जगदम्बे आएगी” भजन भी अवश्य करे, जिसमें माँ दुर्गा के आगमन और उनकी महिमा का सुंदर चित्रण किया गया है।

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